टीकाकरण तालिका – बच्चों के लिये

बच्चे के पैदा होते ही बीमारीयां भी जन्म लेती हैं। कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जिन्हें जन्म के बाद खत्म किया जा सकता है। पुराने समय में यह संभव नहीं था क्योंकि लोगों को जानकारी नहीं रहती थी कि बच्चे को कौन से टीके कब और किस बीमारी से बचने के लिए लगाना चाहिए। बच्चों की टीका सारणी होती है जिसके अनुसार उन्हें टीका लगाया जाता है। जिनका समय पर लगना जरूरी है। क्योंकि इन टीकों का समय पर न लगने से बच्चे को खसरा, टाईफाईड, टी बी, पोलियो और मरस जैसी खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।

वैदिक वाटिका आपको कुछ टीकों के बारे में बता रही है जिनका समय पर लगना जरूरी है और हर मां-पिता को इनके बारे में जानकारी होनी चाहिए। ताकि आपका  बच्चा स्वस्थ और निरोगी रहे।

बी सी जी(BCG)

बी सी जी का टीका बेहद जरूरी टीका होता है यह शिशु के जन्म के समय पर लगवाना चाहिए। क्योंकि इस टीके के द्वारा शिशु को टी बी की बीमारी नहीं लगती है। टी बी एक जानलेवा बीमारी है। इसलिए अपने बच्चे को बी सी जी का टीका लगवाना न भूलें। 

हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी शिशु को उसके जन्म के 6 माह के बाद लगवाया जाता है। इस टीके से शिशु पीलिया से बचता है। यह टीका तीन बार में दिया जाता है। 

डी पी टी(DPT)

डिप्थीरिया का टीका काली खांसी व टेटनेस के लिए बच्चे को दिया जाता है। जिससे वह काली खांसी की बीमारी से मुक्त रहता है। यह टीका शिशु को जन्म के 6 हफ्ते  में लगवाना होता है।

पोलियो( ओ पी यू)

पोलियो की बीमारी भी जानलेवा होती है। हालांकी यह बीमारी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है। पोलियो जिस भी अंग को लग जाता है वह खराब हो जाता है। और अंग कमजोर होकर सूख जाता है। इसलिए इस टीके को शिशु को 6 सप्ताह की शुरूवात से लेकर 5 साल की आयु तक पोलियों ड्राप के रूप में भी पिलवाया जाता है।

एम एम आर(MMR)

गलसुआ और खसरा जैसी खतरनाक बीमारीयों से बचने के लिए इस टीके को लगवाना चाहिए। यह शिशु के पैदा होने के 9 महीने के बाद लगवाया जाता है।

हेपेटाइटिस ए

यह टीका खाने-पीने से फैलने वाले पीलिया रोग से बचने के लिए लगाया जाता है। ये टीका शिशु को एक वर्ष की आयु में लगवाना चाहिए।

वेरिसेला

ये टीका शिशु को चेचेक के रोग से दूर रखता है। इस टीके को बच्चे को जन्म के 15 महीने के बाद लगाया जाता है और दूसरा टीका शिशु को 5 वर्ष की उम्र में लगाया जाता है।

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