पानी की कमी से होने वाली बीमारियां

पानी की कमी से होने वाली बीमारियां

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो पानी का कम सेवन करते हैं। जिसके कारण उनके शरीर में पानी की कमी आने लगती है और उन्हें कई बीमारियों से गुजरना पड़ता है। उन्हें लगता है कि पानी की कमी के कारण रेगिस्तान के लोगों को ही बीमारियाँ लग सकती है। जब शरीर में पानी की कमी आ जाती है तब उन्हें कई बार अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है।

अनेक कारणों से शरीर में पानी की क्रोमिक कमी हो सकती है। जिसके आपको गंभीर दुष्परिणामों में गुजरना पड़ता है और यह भी जरूरी नहीं है कि इसके लक्षण एकाएक ही प्रकट हो क्रोनिक डिहाइड्रेशन बहुत व्यापक समस्या बनता जा रहा है।

यह उन व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है जो पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करते। पानी की कमी से उन्हें थकान, उर्जा में कमी, असमय वृद्दावस्था, मोटापा, लो और हाई ब्लडप्रेशर आदि समस्याओं से गुजरना पड़ता है। तो चलिए सेहत संसार आपको बताता है पानी की कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में।

थकान और ऊर्जा की कमी

जब आप पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करते तब आपकी एंजाइमेटिक गतिविधियां धीमी होने लगती हैं। इससे आपके शरीर में उर्जा की कमी होने लगती है और आपको थकान का एहसास होता है।

असमय वृद्धावस्था

नवजात शिशु के शरीर में जल की मात्रा 80 प्रतिशत होती है जो कि व्यस्क होने तक घटते घटते 70 प्रतिशत तक रह जाती है और उम्र बढ़ने के साथ साथ और अधिक घटती जाती है।

मोटापा

हम अक्सर नम और तरल भोजन क सेवन करना पसंद करते हैं इसलिए हम आवश्यकता से अधिक भोजन कर लेते है। क्योंकि प्यास को ही लोग भूख समझ लेते हैं, जिसके कारण उनमें मोटापा हो जाता है।

हाई और लो ब्लड प्रेशर

शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त की मात्रा धमनियों, शिराओं और रक्त वाहिनियों के तन्त्र को पूरी तरह से भरने के लिए पर्याप्त नहीं होते। जिसके कारण उन्हें हाई और लो ब्लडप्रेशर से गुजरना पड़ता है।

कोलेस्ट्रोल

शरीर में पानी की कमी होने से कोशिकाओं के भीतर स्थित द्रव कम हो जाता है। शरीर अधिक कोलेस्ट्रोल का निर्माण करके इस नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करता है।

पेट के अल्सर

पेट की म्यूकस झिल्ली भीतरी सतह को अम्लीय पाचक रसों द्वारा नष्ट हो जाने से बचाने के लिए म्यूकस की एक परत हमेशा स्त्रावित होती रहती है। पानी की कमी से अम्ल बनने की गति बढ़ जाती है। जिसके कारण पेट में छाले होने लगते हैं।

सांस संबंधी कठिनाई

फेफड़ों की भीतरी म्यूकस झिल्ली भी सांस के रास्ते भीतर आने वाले कणों को जकड़ लेती है। शरीर में पानी की कमी होने के कारण इसकी क्षमता भी प्रभावित होती है।

कब्ज की समस्या

जब चबाया हुआ भोजन आँतों में जाता है तब इसमें मौजूद द्रव के कारण मल भली भांति बनता है और आंत पानी को सोख लेती है। पुराने कब्ज में आंतें शरीर के अन्य अंगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी को अधिकता से सोखने लगती है।

पाचन विकार

क्रोनिक डिहाइड्रेशन में पेट में पाचक रसों का निर्माण घट जाता है।

एक्जिमा

त्वचा पर नमी बने रहें इसके लिए यह बहुत ही जरूरी हैं कि बीस से चौबीस औंस पसीना बना रहें ।जो एसिड की तीव्रता को कम करता है। अगर आपके शरीर में इस दर में कमी आ जाती हैं तब आपकी त्वचा में खारिश खुजली होने लगती है।

दिन में कितना पानी पियें

हम सांस लेने, पसीना बहाने और मल मूत्र को त्यागने के कारण अपने शरीर का पानी खोते रहते हैं। शरीर की सभी गतिविधियां भलीभांति चलती रहें तब इसके लिए यह बेहद जरूरी है कि शरीर में होने वाली पानी की कम कमी की भरपाई पानी पीकर तथा तरल भोजन लेकर करें।

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