ब्रोंकाइटिस के लक्षण और आयुवेर्दिक उपचार

ब्रोंकाइटिस एक गंभीर रोग है। इस समस्या से आजकल काफी लोग परेशान हैं। आइये सबसे पहले जानते हें ब्रोनकाइटिस क्या होता है। यह दो प्रकार का होते हैं पहला दीर्घकालीन और दूसरा तेज ब्रांकाइटिस। दीर्घकालीन ब्रोंकाइटिस में महीनों और सालों तक बलगम वाली खांसी रहती है और रोगी को श्वांस संबंधी परेशानी भी होने लगती है। तीव्र ब्रांकाइटिस इस तरह के ब्रांकाइटिस में छाती में बेचैनी, बुखार और फलू होता है। सर्दी और जुकाम के बाद तीव्र ब्रोंकाइटिस हो सकता है। आज हम  आपको बता रहें हैं कि यह किस वजह से होता है ब्रांकइटिस का रोग और ब्रांकाइटिस की समस्या का आयुवेर्दिक उपचार।

जैसा की आपको उपर बताया गया है कि ब्रांकाइटिस दो तरह का होता है। दोनों की अलग-अलग वजह होती हैं। तीव्र ब्रांकाइटिस फलू या किसी विषाणु के अलावा सर्दी-जुकाम के बिगड़ने से होता है।

वहीं दूसरी ओर दीर्घकालीन ब्रांकाइटिस की सबसे बड़ी वजह होती है अधिक धूम्रपान व मदीरा का सेवन करना। लेकिन ब्रांकाइटिस की और भी मुख्य वजह हैं जैसे यह रोग विषैली गैस, धूल, प्रदूषण और चूल्हे से निकलने वाले धूएं से भी होता है।

आइये अब जानते हैं ब्रांकाइटिस में रोगी में क्या-क्या लक्षण दिखाई देते हैं:

  • सांस लेते हुए घरघराहट की आवाज आना।
  • हांफने की दिक्कत होना।
  • बलगम वाली खांसी होना। जिसमें बलगम का रंग पीला, सफेद, हरा और भूरे रंग का होता है।
  • बार-बार थकावट लगना।
  • नाक का बंद रहना ।
  • नाक का बहना।
  • सर्दी-जुकाम बने रहना।
  • बुखार आना।
  • सूजन और जलन होना।
  • सीने में जलन, दर्द और बेचैनी होना।
    ब्रांकाइटिस एक ऐसा रोग है जो फेफड़ों तक हवा को पहुंचने में अवरोध पैदा करती है जिससे बलगम और कफ शरीर में बनने लगता है। ब्रांकाइटिस रोग लगने की सबसे अधिक संभावना छोटे बच्चों, बड़ों के अलावा अधिक धूम्रपान करने वाले लोगों और जो लोग धूएं में अधिक काम करते हैं उन्हें हो सकती है।

आयुवेर्दिक उपचार ब्रांकाइटिस का

  • दो चम्मच शहद में, दो चम्मच अदरक के रस को मिलाकर सेवन करने से ब्रांकाइटिज रोग ठीक होता है।
  • हरड़ का चूर्ण और सौंठ जो कि अदरक का चूर्ण कहलता है। इन्हें बराबर मात्रा में अच्छे से मिला लें और इस चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से ब्रांकाइटिस से निजात मिलता है।
  • रोज एक आंवले का मुरब्बा या आंवले से बना हुआ जाम को खाने से ब्रांकाइटिस रोग ठीक होता है।
  • सेब का सेवन करने से भी ब्रांकाइटिस रोग में राहत मिलती है।
  • दूध में चीनी की जगह शहद मिलाकर पीने से भी ब्रांकाइटिस में राहत मिलती है।
  • ब्रांकाइटिस की बीमारी आजकल बहुत ही तेज गति के साथ बढ़ रही है। खासकर बच्चे इस बीमारी का अधिक शिकार हो रहे हैं। ऐसे में अगर बच्चों को दूध में शक्कर के स्थान पर शहद मिलाकर पिलाया जाएं। तब वह बहुत ही जल्दी ठीक हो सकते हैं। शहद को दूध में मिलाकर पीने से कफ वाली खांसी भी ठीक होती है और दोबारा नहीं होती।
  • पांच ग्राम सौंठ और दस ग्राम गुड को मिलाकर सेवन करने से ब्रांकाइटिस ठीक होता है। इस उपाय को लगातार एक महीने करने से आपको अच्छे परिणाम मिलेगें।
  • आधा गिलास उबले हुए पानी में दालचीनी के पाउडर और सौंठ को बराबर मात्रा में मिला लें। और जब यह गुनगुना हो जाए तब इसे पीएं। इस उपाय से भी ब्रांकाइटिस में जल्दी राहत मिलती है।
  • लहसुन की दो से तीन कलियाँ दूध में डाल कर उबाल लें और रात को सोने से पहले इसे पी लें। यह एक बेहतर एंटी बायोटिक है। इसमें एंटी वायरल तत्व पाएं जाते हैं जो खांसी से राहत दिलाते हैं।
  • एक गिलास दूध में चुटकी भर हल्दी डालकर उबाल लें। फिर इसे खाली पेट एक चम्मच घी के साथ लें। इस उपाय को नियमित रूप से करने पर धीरे धीरे ब्रांकाइटिस खत्म होने लगेगा।
  • इस रोग के साथ जब रोगी को सुखी खांसी हो तो उसे दिन में कई बार गर्म पानी पीना चाहिए और साथ ही उसे गर्म पानी से भाप लेनी चाहिए।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर मालिश करनी चाहिए तथा इसके साथ साथ उसकी कमर पर सकाई भी करनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत फायदा मिलता है। इससे पुराना ब्रांकाइटिस भी ठीक हो जाता है।

ब्रांकाइटिस में सावधानी

  • यदि आप ब्रांकाइटिस की समस्या से बचना चाहते हैं तो आपको अपनी कुछ आदतों में बदलाव लाना होगा जैसे खाना खाने से पहले अपने हाथों को अच्छे से साफ करें,
  • जिन्हें अधिक सर्दी-जुकाम लगता हो उन लोगों से दूर रहें,
  • रोगी को चूल्हे, प्रदूषण या धूएं वाली जगह से बचना चाहिए।
  • रोगी को अधिक धूम्रपान नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे इस  रोग की अवस्था ओर अधिक हो सकती है।
  • बच्चों को नियमित रूप से टीका लगवाएं और जिन लोगों की उम्र 50 से 60 के बीच या उपर है उन्हें नमोनिया का टीका जरूर लगवाना चाहिए।
  • रोगी को लेसदार चीजों से दूरी बना कर रखनी चाहिए।

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