मंदिर क्यों जाना चाहिए – वैज्ञानिक रहस्य

मंदिर आप में से सभी जाते होगें या कुछ नहीं भी जाते होगें। भारत में हर जगह मंदिर होता है। भले ही हमारे पास मंदिर जाने का समय न हो लेकिन मंदिर के बारे में वैज्ञानिकों के द्वार दिए गए तथ्यों को जानकर आप भी मंदिर जाने लगेगें। पुराने समय से लोग मंदिरों में भगवान के दर्शनो के लिए जाते थे तब तक शायद उन्हें भी इस चीज के बारे में पता न रहा हो कि इसके वैज्ञानिक फायदे भी होते हैं। आखिर क्या है मंदिर जाने के वैज्ञानिक रहस्य वैदिक वाटिका आपको तथ्यों के आधार पर जानकारी दे रही है।

मंदिर में जाने के वैज्ञानिक रहस्य

 

मंदिर का वास्तु 

जिस भी जगह पर मंदिर होता है वो सकारात्मक  उर्जा को प्रवाहित करता है। मंदिर हमेशा उत्तर की तरफ बना होता है। उत्तर को उर्जा और विद्युत चुंबकीय तरंगों का स्त्रोत माना जाता है। जब भी आप मंदिर जाते हैं तब आप पर इन तरंगों का असर पड़ता है जिससे कुछ ही पल में आपका दिमाग सकारात्मक हो जाता है। 

 

मंदिर के बाहर जूते चप्पल उतारने का तथ्य

विश्व में मंदिर ही सबसे पहली एैसी जगह बनी जहां जूते व चप्पलों को बाहर उतारा जाता रहा है। मंदिर के अंदर नंगे पैर जाने से इलेक्ट्रोमैगनेटिक तरंगों का असर पैरों के जरिए शरीर पर होने लगता है जो आपकी सेहत को ठीक बनाए रखती है और आप उर्जावान होते हो।

मंदिर में दिये और कपूर जलाने का वैज्ञानिक महत्व

आरती व मूर्ति पूजा के समय कपूर जलाया जाता है। कपूर जलने से हमारी देखने वाली इंद्री यानि आखें सक्रिय हो जाती हैं। और आंखों के रोग भी दूर होते हैं।

फूल चढ़ाने के वैज्ञानिक लाभ

मूर्ति पर फूल चढ़ाने से भी हमारी सूंघने की इंद्री को बल मिलता है जिससे नाक संबंधी रोग भी ठीक होते हैं। जब मंदिर में फूल चढ़ते हैं तो उनकी खुशबू से जो उर्जा पैदा होती है वो सेहत के लिए लाभदायक होती है।

परिक्रमा

मंदिर के परिसर व मूर्ति की परिक्रमा के भी अपने वैज्ञानिक लाभ हैं। परिक्रमा 7 से 21 बारी तक लगाई जाती है। परिक्रमा लगाने से शरीर में सकारात्मक उर्जा आने लगती है। और भटका हुआ मन भी शांत होने लगता है।

मंदिर की मूर्ति 

मूर्ति ऐसी जगह पर स्थापित होती है। जो उर्जा का भंडार अपने पास रखती है। किसी भी मूर्ति के सामने आप जब खड़े होते हैं तब शरीर के अंदर अपने आप ही सकारात्मक उर्जा बहने लगती है। 

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