विटामिन डी के फायदे

विटामिनो में एक होता है विटामिन डी और हर इंसान को विटामिन डी की जरूरत होती है। विटामिन डी वसा में घुलनशील प्रो.हम्रोंन का एक समूह है । जो हमारे शरीर में कैलिशयम का निर्माण करने में मदद करती है और कैलिशयम हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद करती है। विटामिन डी शरीर के विकास और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है। धूप के सम्पर्क में आने से त्वचा विटामिन डी निर्माण करने लगती है। विटामिन हमे खाने वाली कुछ चीजो से भी मिलता है। लेकिन खाने वाली चीजो में विटामिन डी की मात्रा कम होती है । विटामिन डी की कमी की वजह से से हमारी हड्डियां कमजोर होने लगती है और वह आसानी से टूट भी जाती है। साथ ही  विटामिन डी की कमी से बच्चो में रिकेट्स का खतरा बढ़ जाता है। आइये जानते हैं विटामिन डी के फायदें के बारे में।

 

 

विटामिन डी का स्तर शरीर में अधिक होना भी हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। शरीर के भिन्न अंगों में गुर्दा, दिल, रक्त वाहिकाओ और अन्य स्थानों में पथरी हो सकती है। विटामिन डी शरीर में कैलिशयम के स्तर को भी नियंत्रित करता है। विटामिन डी के दो मुख्य रूपों में पाया जाता है।

  • एक विटामिन डी 2 या अग्रोकेल्सिफेरोल और
  • दूसरा विटामिन डी 3 कोलेकेल्सिफेरोल ।

 

सूर्य प्रकाश

खाद्य एव अन्य चीजों से मिलने वाली विटामिन डी निष्क्रिय होता है। और इनसे मिलने वाला विटामिन डी बहुत समय के बाद शरीर को लगता है। जबकि त्वचा जब धूप के सम्पर्क में आती है तो शरीर में विटामिन डी निर्माण आरम्भ होने लगता है। विटामिन डी मनुष्य के साथ-साथ मछलीयो में भी पाया जाता है। विटामिन डी कैंसर और टीबी जैसे रोगों से भी बचाता है। शरीर को बहारी संक्रमण से बचाने वाली टी कोशिकाओ को भी विटामिन डी के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में विटामिन डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

विटामिन डी के फायदे

  • विटामिन डी हमारी हड्डियों को तो मजबूत करता है साथ ही इससे से बच्चों का विकास सही तरह से हो पाता है।
  • प्राकृति ने सूरज की धूप हमें मुफ्त में प्रदान की है। धूप से विटामिन डी मिलती है जो त्वचा की उपरी व अंदरूनी सतह के विकारो को दूर करती है। सूरज की किरणें त्वचा के लिये रामबाण हैं।
  • सूरज का हरा रग आखो के रोगए मधुमेह, चर्म रोग, दाद ए खुजली, जुकाम व सिरदर्द को दूर करने में लाभदायक होता है । ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं।
  • मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए रोगियों को अपने खाने में नियमित रूप से विटामिन डी को शामिल करना चाहिए। यह मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करता है। मधुमेह में विटामिन डी लेने से इसको डायबिटीज बढने का खतरा कम हो जाता है। खून में विटामिन डी होने से डायबिटीज की चपेट में आने का खतरा 24 फसिदी तक घट जाता है। विटामिन डी के स्त्रोत सूर्य के प्रकाश से मधूमेह रोग के ठीक होने की भी सभावना रहती है।
  • विटामिन डी से रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है।
  • कैसर एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही हर किसी को डर लगता है यह बहुत ही तेजी से फैलता है । विटामिन डी के सेवन से कैंसर को कम किया जा सकता है। बीस साल के बाद महिलाओं को प्रतिदिन विटामिन डी की एक गोली का सेवन करना चाहिए।
  •  विटामिन डी बुखार और सक्रामक बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखती है। विटामिन डी 3 लेने से व्यक्ति का इम्यून सिस्टम सक्रामक बीमारियों से लड़ने की क्षमता  पैदा करता है।
  • विटामिन डी 3 के जरिये शरीर में फैलने वाले संक्रमण और परजीवों को रोकने में मदद मिलती है ।
  • पिछले कुछ सालों में विटामिन डी को स्वाइन फ्लू रोकने के लिए असर कारक दवा के रूप में प्रयोग किया जा रहा है ।

 

विटामिन डी के स्त्रोत

विटामिन डी अड़े के पीले भागए मछली के तेल, मक्खन, दूध और धूप में मिलता है। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए जरूरी है कि प्रतिदिन सुबह.सुबह धूप सेकी जाए। इतना ही नही विटामिन डी से युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से भी शरीर की भीतरी कमजोरी को दूर किया जा सकता है ।

 

हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को सक्रिय रखने के लिए विटामिन डी की भरपाई करना जरूरी है। लेकिन इसका मतलब ये नही कि आप जरूरत से ज्यादा  इसका इस्तेमाल करें। विटामिन डी की अधिकता से कई बीमारिया हो सकती है जैसे कोलेस्ट्रोल का बढ़ जानाए रक्तचाप का बढ़ जानाए दिल से संबंधित रोग आदि इसके साथ ही चक्कर आनाए कमजोरी लगना और सिरदर्द आदि भी हो सकता है। विटामिन डी के अधिक प्रयोग से दस्त भी हो सकते हैं।

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