वायरल फीवर के लक्षण और बचने के आयुवेर्दिक उपचार

वायरल फीवर यानि कि मौसमी बुखार ये बुखार मौसम  में आए बदलाव की वजह से होता है।यह फीवर बहुत ही सूक्ष्म जीवाणु या वायरस का कारण होता है। वायरल बुखार की वजह से शरीर बीमारियों से नहीं लड़ पाता है। क्योंकि यह बुखार हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर बना देता है।

जब कोई व्यक्ति इससे ग्रस्त होता है तब उसका बुखार अचानक से तेज होने लगता है इसके साथ ही बुखार से पीड़ित व्यक्ति को बहुत ज्यादा सिर दर्द, हाथ पैर में दर्द और बदन में दर्द रहता है। वायरल फीवर बहुत तेजी से एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंच जाता है जिससे यह बुखार एक साथ कई लोगों को हो जाता है।

वायरल फीवर दूसरे बुखारों की तरह होता है लेकिन समय पर ध्यान न देने से यह बुखार खतरनाक रूप ले सकता है। इसलिए जब भी आपको बुखार होता है और वह पांच दिन के अंदर ठीक नहीं होता तब आपको अपने खून की जांच करवानी चाहिए

क्योंकि बुखार के अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे टायफाइड, मलेरिया, लीवर की सुजन,न्युमोनिया, यूरिन में इन्फेक्शन आदि सेहत संसार आपको बता रहा  है वायरल बुखार से बचने के आयुवेर्दिक उपाय।
वायरल फीवर के मुख्य लक्षण
खांसी होना
गला दर्द करना
सिर दर्द होना

पेट दर्द होना
थकान होना
हाथ और पैरों के जोड़ों का कमजोर होना और उनमें दर्द होना

उल्टी और दस्त होना।
बदन में दर्द।
आंखों का लाल होना।
माथे का बहुत तेज गर्म होना आदि।

यदि इन लक्षणों में से कोई सा भी लक्षण आपको लगता है तो समझें इंसान को वायरल फीवर हो गया है। बड़ों के साथ यह वायरल फीवर बच्चों में भी तेजी से फैलता है।
वायल फीवर से बचने के आयुवेर्दिक उपचार

हल्दी और सौंठ यानि अदरक का पाउडर
अदरक में एंटी आक्सिडेंट गुण बुखार को ठीक करते हैं।

एक चम्मच काली मिर्च का चूर्ण
एक छोटी चम्मच हल्दी का चूर्ण और
एक चम्मच सौंठ यानि अदरक का पाउडर।
एक कप पानी।
और हल्की सी चीनी।
इन सभी को किसी बर्तन में डालकर तब तक उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाए।

इसके बाद इस पानी को थोड़ा ठंडा करके रोगी को पिलाएं। इससे वायरल फीवर से आराम मिलता है।
तुलसी का इस्तेमाल
एंटीबायोटिक गुण होते हैं तुलसी में जिससे शरीर के अंदर के वायरस खत्म होते हैं।

कैसे करें तुलसी का प्रयोग वायरल बुखार में
तुलसी एक गुणकारी औषधी है, एक चम्मच लौंग के चूर्ण और दस से पंद्रह तुलसी के ताजे पत्तों को एक लीटर पानी में मिला लें।
और इसे इतना उबालें जब तक यह सूखकर आधा न रह जाये। इसके बाद इसे छानें और ठंडा करके हर एक घंटे में वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को पिलायें।

धनिया
धनिया सेहत का धनी होता है। इसलिए यह वायरल बुखार जैसे कई रोगों को खत्म करता है।
वायरल फीवर के बुखार को खत्म करने के लिए धनिया चाय बहुत ही असर कारक औषधि का काम करती है।

धनिया की चाय बनाने की विधि
एक बड़ी चम्मच धनिया के दानों की लें और इसे एक गिलास या कप पानी में डालकर उबालें। फिर इसमें थोड़ी सी मात्रा में दूध और कम मात्रा में चीनी डालकर इसे उबालें।
अब गरम-गरम चाय को रोगी को पिलाएं।
इस कारगर घरेलू नुस्खे से वायर फीवर में आराम मिलेगा। सोआ, काली मिर्च और कलौंजी का प्रयोग
सोया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। जिससे वायरल बुखार कम होने के साथ.साथ पूरी तरह से उतर जाता है।

एक छोटी चम्मच काली मिर्च का चूर्ण
एक बड़ी चम्मच सोआ के ताजे दाने
एक चुटकी दालचीनी का चूर्ण
और आधा चम्मच कलौंजी को एक कप पानी में डालकर पंद्रह मिनट तक उबालें।

जब यह अच्छी तरह से उबल जाए तब इसे साफ कपड़े से छानकर किसी बर्तन में रख दें। और थोड़ा ठंडा होने पर वायरल फीवर से ग्रसित इंसान को देते रहें।
मेथी का पानी
आपके किचन में मेथी तो होती ही है। मेथी में वायरल बुखार को रोकने की क्षमता होती है।
मेथी के दानों को एक कप में भरकर इसे रात भर के लिए भिगों लें। और सुबह के समय इसे छानकर रोगी को हर एक घंटे में पिलाते रहें।
नींबू और शहद
नींबू का रस और शहद भी वायल फीवर के असर को कम करते हैं। आप रोगी को शहद और नींबू का रस का सेवन भी करा सकते हैं।

सफेद नमक, अजवाइन और नींबू  का प्रयोग

एक छोटा चम्मच सफेद नमक का लीजिए। उसे तवे पर तब तक भूनिए जब तक उसका रंग न बदल जाएं। इसके बाद चम्मच अजवाइन को  भी भुन लें। अब इसे एक गिलास पानी में मिला लें। बाद में इसमें नींबू को निचोड़ कर पी लीजिए। इसका सेवन सुबह शाम करें इसका प्रयोग दिन में दो से तीन बार करने से आपको एक ही दिन में वायरल बुखार से निजात मिल जाएगी।

चावलों का मांड

चावलों के मांड को हम राइस स्टार्च भी कहते हैं। इसका उपयोग भी वायरल फीवर को कम करने के लिए किया जाता है। चावलों का मांड शरीर से विषेले तत्वों को बाहर निकालने के ले किया जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में पौष्टिकता पाई जाती है जो वायरल बुखार से आई हुई कमजोरी को दूर करने में सहायक होता है।

वायरल फीवर से बचने के तरीके

अगर आपको किसी कारण उस स्थान पर जाने पड़े। जहां वायरस का खतरा अधिक हो तब इसका सबसे अच्छा बचाव यह है कि वहां पर मुंह और नाक को ढंक लें। घर से बाहर मास्क डालकर निकलें या फिर रुमाल या सूती कपड़े से नाक को बांधकर निकलें।

यदि उपर लिखी गए आयुवेर्दिक घरेलू नुस्खों से रोगी में कोई असर न दिख रहा हो तो यह समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए बिना किसी देर के रोगी को चिकित्सक के पास ले जाएं।

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