वातायनासन करने की विधि और फायदे

आप तो जानते ही हैं कि भारत में अनके योगी हुए हैं। इसी तरह भारत में वातायन नाम के एक महान योगी हुए थे। उन्हीं के नाम से वातायनासन नामक योग का नाम पड़ा। वातायन अपनी तप्सया को इसी आसन में ही किया करते थे। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे करें वातायनासन को और इससे मिलने वाले फायदों के बारे में।
सबसे पहले आपको बता दें वातायनासन योग को करने के फायदे
यह आसन पुरूषों में ब्रह्मचर्य की रक्षा करता है। इस आसन को करने से बहुमूत्रता की समस्या खत्म होती है।
डायबिटीज यानि की मधुमेह में यह योग अत्यंत लाभकारी है।
वीर्य विकार दूर हो जाता है।
स्वप्न दोष की बीमारी इस योग को करने से दूर हो जाती है।
यह योग हर्निया, शीध्रपतन और सायटिका जैसे कई रोगों की समस्या में
लाभदायक होता है।
कमर का दर्द हो या घुटनों का दर्द इस आसन को करने से लाभ मिलता है।
गर्दन, मेरूदण्ड और पिंडलियां पुष्ट होती हैं।

आइये अब जानते हैं कैसे किया जाता है वातायनासन योग को

सबसे पहले जमीन पर एक कंबल बिछा लें।
अब सीधे खड़े हो जाएं।
दोनों पैरों के घुटने आपस में मिल हुए हों।
नितंब, एड़िया और सिर का पिछला भाग सीधा हो।
अब दाहिनी टांग को घुटने से मोड़ कर इसे टांग के पांव को बांई टांग के जंघा के मूल पर रख दें जैसा कि चित्र 2 में दिखाया गया है।
अब आप अपने दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में जोड़ लें।
इसके बाद आब बाईं टांग के घुटने को, धीरे धीरे सामने की ओर
मोड़ते हुए, दाहिने घुटने को, धीरे धीरे बाएं पैर की एड़ी के पास जमीन
से सटा लें। जैसा कि चित्र तीन में दिखाया गया है।
यह इस आसन की पूर्ण स्थिति है।
आप अपन श्वांस को सामान् गति से ही लेते रहें।
जितनी देर हो सके आप इस आसन में रूक सकते हैं उतना ही यह आपके लिए
बेहतर होगा।
इसके बाद आप आराम से वापस अपनी पहली अवस्था में आ जाएं और
दूसरे पैर से भी इस आसन को करें।

इस आसन की सावधानी
कृपय महिलाएं और लड़कियां इस आसन को ना करें।

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