उत्काटासन के फायदे और विधि

उत्काटासन-योग

इस योग का उत्काटासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह आसन कुर्सी पर बैठने जैसी स्थिति वाला होता है। जैसे हम कुर्सी पर बैठते हैं ठीक वैसे ही उत्काटसान योग में किया जाता है। यह आसन मानव शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। वैदिक वाटिका आपको बता रही उत्काटासन योग के लाभ और इसको करने का तरीका।

सबसे पहले जानते हैं उत्काटासन योग के फायदे क्या होते हैं
उत्काटासन करने से पथरी रोग में नहीं होता है।
इस आसन को करने से हर्निया की बीमारी नहीं होती है।
पैरों की पिंडलियां ताकतवर होती है।
कमर का दर्द
गठिया और
साइटिका जैसे रोग दूर होते हैं।
इसके अलावा कमर मजबूत और लचीली भी बनती है।

उत्काटासन करने का तरीका
जमीन पर दरी या कंबल बिछा लें। और उसके उपर सीधे खेड़े हो जाइए।
पैरों की दोनों एड़ियां आपस में मिली हुई हों। और पंजे खुले हुए हों।
अपने दोनों हाथों को अपने दानों कूल्हों पर रखें। जैसा कि चित्र 1 में दिखाया गया है।

इसके बाद अपने दोनों हाथों को सीधे सामने की ओर फैला लें। जैसा कि चित्र 2 में दिखाया गया है।
हथेलियों का मुख जमीन की तरफ होना चाहिए।

इसके बाद अपने घुटनों को सामने की ओर मोड़ें और अपने शरीर को नीचे की तरफ ले जाएं। जैसा कि कुर्सी पर बैठते हुए करते हो।

चित्र 3 के अनुसार आपको लगना चाहिए की आप किसी कुर्सी पर बैठे हुए हैं। उत्काटासन की पूर्ण स्थिति होती है ये।

उत्काटासन योग के अुनासर आपके पैरों के दोनों पंजो के उपर सारे शरीर का भार होना चाहिए। कुर्सी पर बैठते वक्त हमारे पंजे जमीन से छूते हैं एड़ियां नहीं।

उत्काटासन योग की सावधानी
इस योग को गर्भवती महिलाएं ना करें।
इसके अलावा जिन लोगों के घुटनों और पेट का आॅपरेशन हुआ हो वे भी इस योग को ना करें।
किसी अच्छे योग गुरू की रेख देख में यह आसन करें।

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