तुलसी माला और रूद्राक्ष माला के लाभ

पुराने समय से ही भारत में रूद्राक्ष और तुलसी को औषधियों की माला के रूप में पहना जाता रहा है। रूद्राक्ष और तुलसी दोनों का ही धार्मिक महत्व है लेकिन आधुनिक विज्ञान ने रिसर्च के आधार पर माना है कि संस्कृत में मंत्रों को पढ़ने से जीभ और होंठ से जो क्रिया गले में होती है उससे गले की धमनियों में प्रभाव पड़ता है जिसके कारण गलगंड और कंठ संबंधी आदि रोगों की आशंका बनती है। इन रोगों से बचने के लिए तुलसी और रद्राक्ष की माला को पहना जाता है। 

रूद्राक्ष की माला का महत्व शिवपुराण में बताया गया है। शिवपुराण अनुसार विश्व में रूद्राक्ष माला की तरह और कोई माला लाभ देने वाली नहीं होती है। श्रीमद्र देवी भागवत में भी रूद्राक्ष की माला के महत्व को बताया गया है। 

रूद्राक्ष माला एकमुखी से लेकर चौदहमुखी तक बनाई जाती है। रूद्राक्ष के दानों के अनुसार 16 दानों की माला बाहों, 50 दानों की गले में, 26 दानों की सिर पर और 12 दानों की हाथों की कलाई पर पहनने का विधान है।108 दानों की रूद्राक्ष की माला पहने से अश्वमेघ यज्ञ का यश प्राप्त होता है। और इंसान मृत्यु के बाद शिव लोक जाता है। ऐसा पुराणों में लिखा है।

 रूद्राक्ष की माला पहनने के फायदे

रूद्राक्ष की माला पहनने के धार्मिक और स्वास्थवर्धक फायदे मिलते हैं। जो भी इंसान नियम से रूद्राक्ष की माला को धारण करता है वह संसारिक दुखों व बाधाओं से प्रभावित नहीं होता है। साथ ही इंसान में आत्मशक्ति का विकास होने लगता है। रूद्राक्ष की माला पहनने से मानसिक शांति मिलती है। और दिल दिमाग भी शांत रहता है।

जहां तक सेहत के दृष्टिकोण की बात है। रूद्राक्ष पहनने से इंसान को ठंड व गर्मी से होने वाले रोग नहीं लगते हैं। साथ ही इंसान को ब्लडप्रेशर, उनमाद, रक्त दोष, चक्कर आना आदि रोग नहीं होते।

तुलसी की माला का महत्व

तुलसी की पूजा में ही धार्मिक महत्व है। इसके दानों की माला पहनने से इंसान के अंदर शक्ति का विस्तार होता है। और उसकी तरक्की और यश बढ़ने लगता है। तुलसी की माला पहनने से इंसान के अंदर आकर्षण की शक्ति आती है। ऐसी मान्यता है कि तुलसी माला पहना हुआ इंसान किसी बीमारी व अकाल मौत नहीं मरता। 

स्वास्थ के लिए तुलसी

आधुनिक वैज्ञानिकों ने भी इस बात को माना है कि तुलसी की माला को पहनने से मानव शरीर कई रोगों जैसे सिरदर्द, जुकाम, चर्मरोग, बुखार आदि नहीं लगते। 

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