पढ़ाई करने के टिप्स – बच्चों के लिये

यदि आपके बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता है और पढ़ने के बाद भी नंबर कम आ रहे हों तो इसका मतलब है नकारात्मक उर्जा की वजह से एैसा हो रहा है। वास्तु शास्त्र के अनुसार याददाश्त और पढ़ाई में ध्यान लगाने के लिए कुछ उपाय दिए हैं जिन्हें वैदिक वाटिका आपको बता रही है। इन आसान नियमों का पालन करने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगेगा और नंबर भी अच्छे आएगें।

पढ़ाई की टेबल
पढ़ाई की टेबल जिसे हम स्टडी टेबल भी कहते हैं उसका आकार गोलाकार, आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। यदि टेबल का आकार तिरछा या टूटा हुआ होगा तो इससे बच्चा अपनी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाएगा और कन्फयूज्ड रहेगा। इसलिए टेबल का आकार सही रखें। टेबल के कोने कटे भी नहीं होने चाहिए।

किस दिशा में रखें स्टडी टेबल को
टेबल की दिशा हमेशा उत्तर की ओर होनी चाहिए। उत्तर से सकारात्मक उर्जा आती है। साथ ही बच्चे का चेहरा भी पढ़ते समय उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। एैसा करने से बच्चों की थकान दूर होती है और उनमें उर्जा का संचार होता है।

पीछे की दीवार
पढ़ते समय पीठ पीछे दीवार होनी चाहिए।  यदि पीठ पीछे कोई खिड़की है तो वह उर्जा देती है। जिससे बच्चे का ध्यान भंग नहीं होता है। जो भी काम आपके बच्चे कर रहे हैं उस पर ध्यान अच्छे से लगता है।

सामने कोई बाधा न हो
स्टडी टेबल के सामने कम से कम 2 फिट की दूरी होनी चाहिए। एैसा करने से बच्चे को मिलने वाली उर्जा में कोई बाधा नहीं पड़ती है। इसलिए पढ़ाई वाली टेबल को दीवार से सटा कर नहीं रखना चाहिए।पढ़ने वाले कमरे को व्यवस्थित रखें। नोट्स और पुरानी किताबों को स्टडी रूम में न रखें। इसलिए अपने कमरे को साफ रखें।

स्टडी रूम का रंग
बच्चों के स्टडी रूम की दीवारों का कलर पीला या वायलेट होना चाहिए। इसी तरह कुर्सी और टेबल का रंग भी होना चाहिए।

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डिसक्लेमर : sehatsansar.com में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी sehatsansar.com की नहीं है। sehatsansar.com में दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलह लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।