प्रोटीन के स्रोत और प्रोटीन के फायदे

क्या आप जानते हैं प्रोटीन सेहत के लिए कितना जरूरी है। और इसे किस उम्र तक लेना ठीक होता है। वैदिकवाटिका आपको बताएगा। प्रोटीन क्या है? प्रोटीन ओक्सिजन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन से बनने वाला तत्व है। जो शरीर को बीमारियों से बचाने का काम करता है। प्रोटीन ही शरीर को अंदर और बाहर से मजबूत बनाता है। लेकिन प्रोटीन लेने की भी एक उम्र होती है जिसके बाद प्रोटीन शरीर के लिए नुक्सानदायक होता है। क्योंकि यह सीधे पाचन शक्ति को प्रभावित करता है।

किन चीजों से मिलेगा प्रोटीन
प्रोटीन शरीर के विकास और उसे बढ़ाने में मदद करता है। प्रोटीन हर इंसान को 35 वर्ष तक की उम्र तक लेना चाहिए।

प्रोटीन के प्राकृतिक स्रोत हैं-

सेम
सेम को फली भी कहा जाता है। इसका सेवन सब्जी के रूप में किया जाता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम की सबसे ज्यादा मात्रा रहती है। यह पेट साफ करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। सेम शरीर को ताकत देती है। यह शरीर के अंदर की गंदगी को साफ बनाने का काम करती है। आंखों की रोशनी को बढ़ाने में सेम एक कारगर औषधि है। सेम का रस पीने से डायबिटीज में फायदा मिलता है।

 

मसूर

शरीर में प्रोटीन की कमी को दूर करने के लिए मसूर की दाल भी फायदेमंद होती है। ये दाल खून को बढ़ाने वाली होती है। इसके अलावा मसूर की दाल कब्ज, प्रदर, दस्त और बहुमूत्र की समस्या को भी दूर करती है। 

 

उड़द

उड़द की दाल में प्रोटीन, विटामिन्स और कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में होते हैं जो कि कई बीमारियों जैसे लकवा, कब्ज, गठिया, दमा और बवासीर जैसे रोगों को कम करती है।

अरहर

प्रोटीन युक्त दालों में अरहर भी होती है। इसमें आयरन और कैल्शियम आदि काफी मात्रा में होता है। यह दाल आसानी से पच जाती है और बीमार इंसान भी इसका सेवन कर सकता है। अरहर की दाल सांस संबंधी रोगों के अलावा कब्ज की समस्या को ठीक करती है। 

मूंग
प्रोटीन का एक और स्रोत है मूंग की दाल। आयुर्वेद में भी मूंग की दाल को कई बीमारियों को खत्म कर देने वाली औषधि कहा गया है। यह शरीर को कफ, वात और बुखार से बचाती है। यदि किसी को खाना नहीं पचता है तो उसे छिलके वाली मूंग की दाल का सेवन करना चाहिए। अंकुरित साबूत मूंग का सेवन करना तो शरीर के लिए बेहद लाभदायक है।

दही
दही प्रोटीन का सबसे अच्छा साधन है। रोज दही के इस्तेमाल से शरीर ठीक और निरोग रहता है। दही इंसान की उम्र को बढ़ाती है। दही से बनने वाला छाछ तो सबसे ज्यादा पौष्टिक होता है। प्रोटीन की हर कमी को पूरा करने में दही बेहद प्रभावशाली है। शरीर से कई तरह की बीमारियों को भी दही के सेवन से खत्म किया जा सकता है। लेकिन कुछ बातें ध्यान में रखनी भी जरूरी हैं। दही का सेवन रात में न करें। और ज्यादा खट्टी दही का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

सोयाबीन
प्रकृतिक रूप से सोयाबीन में प्रोटीन अधिक पाया जाता है। सोयाबीन को कई तरह से प्रयोग में लाया जाता है जैसे दाल, आटा, आदि। सोयाबीन से बनने वाले पदार्थ भी शरीर को प्रोटीन पहुंचाते हैं। यह बच्चों तथा बड़ों को मानसिक और शरीरिक रूप से ठीक बनाती है। जिसकी मुख्य वजह है सोयबीन में प्रोटीन का उच्च स्तर पर होना।

दूध
दूध में मैजूद प्रोटीन की तुलना किसी और पदार्थ से नहीं कि जा सकती है। दूध में प्रोटीन के अलावा फास्फोरस, कैल्शियम, और विटामिन्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। दूध एक पूर्ण आहार है। जो कई बीमारियों को शरीर से बचाता है। दूध कमजोर शरीर को शक्ति देता है।

इन सब के अलावा अरहर की दाल और बेर का सेवन भी कर सकते हो ।  ये भी पढे-टांसिल का घरेलू इलाज

इन प्रोटीनों का सेवन इंसान को 10 वर्ष से 35 वर्ष की उम्र तक करना चाहिए क्योंकि इस उम्र के बाद प्रोटीन शरीर पर गलत असर डालने लगते हैं। इसलिए 35 वर्ष की उम्र के बाद प्रोटीन का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए।

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