शीतली प्राणायाम के लाभ और विधि

इस योग को शीतली प्राणायाम इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आसन को करने से शरीर में ठंडक यानि कि शीतलता आने लगती है। जिस वजह से हमारे शरीर के अंदर कई तरह की बीमारिया खत्म होती हैं।शीतली प्राणायाम इंसान के शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। इसे करना बहुत ही आसान भी होता है। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कि कैसे किया जाता है शीतली प्राणायाम और इससे आपको किन समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

आइये सबसे पहले जानते हैं शीतली प्राणयाम से मिलने वाले फायदों के बारे में
नियमित शीतली प्राणायम को करने से
उच्च रक्तचाप की समस्या को कम व निंत्रित करता है
चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है।
आंखों के रोग ठीक होते हैं।
चर्म रोग में बहुत ही लाभदायक होता है।
अधिक प्यास लगने की समस्या व अधिक पसीने की समस्या ठीक हो जाती है।
भूख व प्यास को काबू किया जा सकता है।
काम या श्रम से लगी हुई थकान आसानी से दूर हो जाती है।
गले के रोग जैसे टांसल आदि ठीक हो जाता है।
मुंह के छाले ठीक होते हैं।
गुस्सा शांत होता है।
यदि जुबान फटी हुई हो वह भी ठीक हो जाती है।
पूरे शरीर की मांसपेशियों में शिथिलता आती है और मानसिक शांति मिलती है।
पित्त की बीमारी और अर्जीण का रोग नहीं होता है।

ये तो थे शीतली प्राणायाम के लाभ। चलिए अब आपको बताते हैं कैसे किया जाता है शीतली प्राणायाम

शीतली प्राणायाम करने की विधि

सबसे पहले आप जमीन पर कंबल या दरी बिछा लें। अब सुखासन व पद्मासन की स्थिति में बैठ जाएं।
कमर, पीठ, रीढ और गर्दन एक सीध मे हो।
दोनों हाथों को घटनों पर रखें।
अब अपनी आंखों को बंद करें।
शांत भाव से बैठे रहे।
फिर अपनी जुबान को बाहर की ओर निकालें।
अब अपनी जीभ के किनारों को उपर की उठाकर मोड़ लीजिए। यानि की आपकी जीभ अर्ध गोल नली की समान बनी हुई हो।
इस तरह से आपके जुबान की आकृति कौए की चोंच जैसी बन जाती है। जैसा कि उपर चित्र में दिखाया गया है।

अब लंबी व गही सांस के जरिए पेट में कंठ तक वायु को भर लें।
अब अपनी जुबान को अंदर करके अपने मुंह को बंद कर लें। जितनी देर हो सकता है उतनी देर तक एैसा करें।
अब अपने दोनों नथुनों से रेचक करके वापस आराम कीजिए।

इस आसान को शुरू में तीन बार दोहराना चाहिए। बाद में आप इसकी अवधि या समय को पंद्राह व बीस बारी तक कर सकते हैं।

शीतली प्राणायाम की सावधानी
यह आसन गर्मियों के मौसम में किया जाता है इसलिए इसे सर्दियों में नहीं करना चाहिए।
कफए दमा व खांसी से ग्रसित लोग भी इस आसन को ना करें।
इस आसान को अधिक देर तक ना करें।