पेशाब में दर्द का आयुवेर्दिक उपचार

पेशाब करते समय दर्द होना आयुर्वेद में मूत्रकृच्छ रोग कहा गया है। इस रोग में पेशाब की इच्छा तो होती है लेकिन दर्द के साथ बूंद.बूंद पेशाब आता है। इस समस्या का मुख्य कारण है मूत्रग्रंन्थि में समस्या आना, गुर्दे की बीमारी, पथरी, सुजाक और प्रदाह आदि से मूत्रकृच्छ की बीमारी होती है। लेकिन अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है आयुर्वेद में इसका इलाज संभव है। वैदिक वाटिका आपको इस समस्या के उपचार के बारे में बता रही है।

मूत्रकृच्छ रोग के प्रमुख लक्षण
पेशाब करते वक्त रूकावट होना
दर्द होना
पेशाब के समय बेचैनी होना
पेशाब से खून आना

पेशाब में दर्द की समस्या का आयुवेर्दिक उपचार
गाजर का जूस एक गिलास रोज पीने से कुछ ही दिनों में पेशाब रूक.रूक कर आने की समस्या खत्म हो जाती है।

कुछ दिनों तक नियमित रूप से गुनगुना पानी का सेवन करें। एैसा करने से मूत्र में होने वाली वेदना यानि कि दर्द से आपको निजात मिल जाएगा।

दूध में पिसी हुई इलायची को मिलाकर पीने से पेशाब में होने वाला दर्द ठीक हो जाता है। और पेशाब में रूकावट नहीं आती है।

मूत्रकृच्छा से छुटकारा पाना चाहते हैं तो दूध में मिश्री और सौंठ को घोलकर दिन में दो बारी सेवन करें।

कुछ दिनों तक फिटकरी की थोड़ी सी मात्रा को पानी से मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीने से पेशाब में दर्द की समस्या ठीक हो जाती है।

गेहूं के 80 ग्राम दानों को रात में भिगो लें और सुबह इन्हें पीसकर इन्हें छान लें। और इसमें थोड़ी मात्रा में मिश्री मिलाकर एक सप्ताह तक पीते रहें। इसे कारगर आयुवेर्दिक उपाय से पेशाब की वेदना ठीक हो जाती है।

कुछ दिनों तक लगातार ताजी छाछ में गुड या फिर सुहागा को मिलाकर पीने से पेशाब के दर्द से आराम मिलता है।

पेशाब रूकने व पेशाब से खून आने पर रात के समय में किसी मिट्टी की हांडी में उबला हुआ आधा लीटर पानी डाल दें और फिर इसमें उपर से धनिया मिलाकर रख दें।
सुबह के समय इसे अच्छी तरह से मसल लें और फिर इसे छानकर इसमें कम से कम तीस ग्राम बताशे मिला लें और दिन में पांच बार पीते रहने से पेशाब से खून की समस्याए पेशाब की रूकावट और बैचेनी बंद हो जाती है।

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