लकवा का आयुर्वेदिक उपचार

लकवा को आयुर्वेद में पक्षाघात रोग भी कहते हैं। इस रोग में रोगी के एक तरफ के सभी अंग काम करना बंद कर देते हैं जैसे बांए पैर या बाएं हाथ का कार्य न कर पाना। साथ ही इन अंगों की दिमाग तक चेतना पहुंचाना भी निष्क्रिय हो जाता है। और इस रोग की वजह से अंगों का टेढापनए शरीर में गरमी की कमीए और कुछ याद रखने की क्रिया भी नष्ट हो जाती है। लकवा रोग में इंसान असहाय सा हो जाता है। और दूसरों पर हर काम के लिए निर्भर होना पड़ता है। आयुर्वेद में लकवा के प्रभाव को कम करने के अनेक उपाय दिए गए हैं।

लकवा की बीमारी के लक्षण
लकवा रोग में शरीर की नसों को पूरी तरह से सुखा देता है। जिसकी वजह से शरीर के अंगों पर खून नहीं पहुचं पाता है। और शरीर का अंग किसी काम का नहीं रह जाता है।
इसके अलावा शरीर के मुख्य अंग जैसे नाक, आंख और कान सभी टेढ़े हो जाते हैं। इस रोग का सबसे बड़ा लक्षण हैं होठों का एक तरफ लटक जाना।

लकवा से बचने के आयुवेर्दिक उपचार :

  • कुछ दिनों तो रोज छुहारों को दूध में भिगोकर रोगी को देते रहने से लकवा ठीक होने लगता है।
  • सौंठ और उड़द को पानी में मिलाकर हल्की आंच में गरम करके रोगी को नित्य पिलाने से लकावा ठीक हो जाता है।
  • नाशपाती, सेब और अंगूर का रस बराबर मात्रा में एक ग्लिास में मिला लें। और रोगी को देते रहें। कुछ समय तक यह उपाय नित्य करना है तभी फायदा मिलेगा।
  •  1 चम्मच काली मिर्च को पीसकर उसे 3 चम्मच देशी घी में मिलाकर लेप बना लें और लकवाग्रसित अंगों पर इसकी मालिश करें। एैसा करने से लकवा ग्रस्त अंगों का रोग दूर हो जाएगा।
  •  करेले की सब्जी या करेले का रस को नित्य खाने अथवा पीने से लकवा से प्रभावित अंगों में सुधार होने लगता है। यह उपाय रोज करना है।
  • प्याज खाते रहने से और प्याज का रस का सेवन करते रहने से लकवा रोगी ठीक हो जाता है।
  •  6 कली लहसुन को पीसकर उसे 1 चम्मच मक्खन में मिला लें और रोज इसका सेवन करें। लकवा ठीक हो जाएगा।
  • तुलसी के पत्तोंए दही और सेंधा नमक को अच्छे से मिलाकर उसका लेप करने से लकावा ठीक हो जाता है। ये उपाय लंबे समय तक करना होगा।
  • गरम पानी में तुलसी के पत्तों को उबालें और उसका भाप लकवा ग्रस्ति अंगों को देते रहने से लकवा ठीक होने लगता है।
  • आधा लीटर सरसों के तेल में 50 ग्राम लहसुन डालकर लोहे की कड़ाही में पका लें। जब पानी जल जाए उसे ठंडा होने दें फिर इस तेल को छानकर किसी डिब्बे में डाल लें। और इस तेल से लकवा वाले अंगों पर मालिश करें।

    सरसों
    धतूरे के बीजों को सरसों के तेल में मंदी आंच में पका लें और  इसे छानकर लकवा से ग्रसित अंग पर मालिश करें।

    तेल
    लकवा से ग्रसित हिस्से पर बादाम के तेल
    सरसों के तेल
    निर्गुण्डी का तेल आदि की मालिश करनी चाहिए।

    मक्खन और लहसुन
    मक्खन और लहसुन भी लकवा की बीमारी में राहत देते हैं। आप मक्खन के साथ लहसुन की चार कलियों को पीसकर सेवन करें।

    सोंठ व दालचीनी
    एक गिलास दूध में थोड़ी सी दालचीनी और एक चम्मच अदरक का पाउडर यानि कि सोंठ को मिलाकर उबाल लें। और नियमित इसका सेवन करें। इस कारगर उपाय से लकवा रोग में आराम मिलता है।

    लकवा में क्या खाएं क्या ना खाएं।
    लकवा होने पर इन चीजों का सेवन जरूर करें
    परवल
    करेला
    गेहूं की रोटी
    लहसुन
    बाजरे की रोटी
    तरोई
    फली।
    इन फलों का सेवन करें
    आम
    चीकू
    पपीता और
    अंजीर।

    इसके अलावा सुबह और शाम दूध का सेवन करें।
    क्या ना खाएं
    तली हुई चीजें
    बेसन
    चना
    दही
    चावल
    छाछ
    और साग का सेवन ना करें।

    त्रिफला का सेवन करने से भी लकवा ठीक हो सकता है।
    लकवा का सही समय पर इलाज न होने से रोगी एक अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर हो जाता है इसलिए समय रहते लकवा का उपचार कराना जरूरी है। आयुवेर्दिक तरीकों से लकवा पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। ये उपाय लंबे समय तक लगातार करने से ही फायदा देगें। इसलिए धैर्य जरूर रखें।

डिसक्लेमर : sehatsansar.com में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी sehatsansar.com की नहीं है। sehatsansar.com में दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलह लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।