नहाने का सही आयुवेर्दिक तरीका

नहाने का आयुवेर्दिक तरीका आपको वैदिक वाटिका बता रही है। जो शायद आपको अब तक मालूम ना हो। अच्छी सेहत और मजबूत शरीर के लिए रोज स्नान करना जरूरी होता है। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य को रगड-रगड़कर नहाना चाहिए। गर्मियों में तो खासतौर से दो बार नहाने की सलाह भी देता है आयुर्वेद।

हमारे वैदिक ग्रथों में12 प्रकार के स्नान हैं।

  • ब्रहम् स्नान या शाही स्नान
  • देव स्नान
  • ऋषि स्नान
  • मंत्र स्नान
  • भैम स्नान
  • अग्नि स्नान
  • मानव स्नान
  • दानव स्नान
  • वारूण स्नान
  • मानसिक स्नान
  • दिव्य स्नान
  • वायव्य स्नान

हम बात कर रहें हैं स्नान करने का वैदिक तरीका क्या है।
एक टब या बाल्टी में ताजा पानी भरें। और उसमें सात दिव्य नदियों के इस आवाहन को करें।
ओम् गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्दु कावेरि जलेस्मिन् सन्निधिं कुरू।।
अब अपने मुंख के अंदर पानी भर लें और अपने सिर को टब या बाल्टी में डालें और उसमें अपनी आंखों को झपकायें।
इससे एक तो आंखों की गर्मी व रोग दूर होते हैं और दूसरा लाभ आखें कमजोर नहीं होती हैं।

अब लोटे या मग्गे से पानी को अपने सिर पर डालें। इससे शरीर की गर्मी उतर जाती है। कुछ लोग पानी को सबसे पहले पैरों में डालते हैं। यह गलत तरीका है नहाने का । क्योंकि इससे शरीर की गर्मी उपर चढ़ने लगती है और इंसान की सेहत भी खराब होती चली जाती है।

नहने के पानी को कीटाणुमुक्त बनाने के लिए आप कई तरह के कैमिकल चीजों का इस्तेमाल करते हो। इसकी जगह आप बाजार मे मिलने वाला गौझरण या गौअर्क की कुछ बूंदे पानी में डालकर नहा सकते हैं।
नहाते समय यदि आप सदा शिव के महामृत्युंजय मंत्र को तीन बार बोलते हैं तो इससे अकाल मौत का खतरा टल जाता है।

अब जानते हैं किस चीज से स्नान करें
नहाने के वैदिक तरीकों के अलावा किस चीज को नहाते समय प्रयोग करना है इस बारे में भी हमें बताया गया है।

कैमिकल युक्त चीजों को लगाकर इंसान उपने चेहरे का सौंदर्य खत्म कर रहा है क्योंकि उसे पता ही नहीं कि भारत की प्राचीन ग्रथों में किन चीजों से नहाने के बारे में कहा गया है। हमारे प्राचीन ग्रथों में लिखे गए नहाने के फायदों को जापान में खूब इस्तेमाल किया जा रहा है।

मुलतानी मिट्टी से नहाने से चेहरे और बालों के रोमछिद्र खुलते हैं जिससे बालों की समस्या और चेहरे की बीमारियां दूर होती हैं।
शरीर को निरोग रखने के लिए साबुन की जगह मुलतानी मिट्टी से नहाने से सौ फीसदी सकारात्मक फायदा मिलता है शरीर को।

जिन लोगों पित्त विकारए आंखों की जलन और गर्मी की समस्या अधिक रहती हो वे मुलतानी मिट्टी को शरीर पर लेप कर कुछ देर के लिए सूखने दें। फिर स्नान करें। आपको इन रोगों से जल्द ही छुटकारा मिल जाएगा।

सुंदर चेहरे के लिए आलू के रस को मुलतानी मिट्टी में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।

उपर दी गई सभी बातें हमारे वेदों में बताई गई हैं। और इन सब का फायदा हम तो कम विदेशी लोग ज्यादा ले रहे हैं। हम भी चाहते हैं आप तक यह दिव्य ज्ञान पहुंचे।

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