म्यूजिक थेरेपी – संगीत सुने रोगमुक्त रहें

जिस तरह से सेहत को ठीक रखने के लिए पौष्टिक भोजन और योग की जरूरत होती है ठीक उसी तरह से इंसान के शरीर को रोगमुक्त और तनाव मुक्त के साथ चुस्त दुरूस्त रखने के लिए संगीत में भी ताकत होती है। पुराने समय से ही भारत में संगीत कला का विशेश प्रभाव रहा है। जिस बात को आज के वैज्ञानिकों नें भी शोध के आधार पर सिद्ध किया है। शोध के अनुसार संगीत का असर सीधा आपकी सोच और शरीर पर पड़ता है। सुबह, दोपहर और रात में भी संगीत का असर इंसान के शरीर पर पड़ता है। 

संगीत सुने रोगमुक्त रहें: म्यूजिक थेरेपी

सुबह उठकर तबला, सितार, बांसुरी और सितार के अलावा जल तरंग को सुनने से शरीर के अंदर जो बदलाव आते हैं वे आपके मूड को तरोताजा तो करते है साथ ही आपके दिन की शुरूआत भी सकारात्मक रूप में होती है। 

दिन या दोपहर के समय संगीत का भी अपना विशेष महत्व है। दोपहर में संगीत सुनने से थकान कम होती है और आप ताजगी का अनुभव करते हो।

इसी तरह रात में भारतीय संगीत जैसे राग, बांसुरी और वायलन सुनने टेंशन खत्म होती है और आपको बहुत अच्छी नींद आती है।

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म्यूजिक थेरेपी यानी संगीत से मिलने वाले अन्य फायदे:

  • संगीत सुनने से हमें ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी नहीं होती है।
  • संगीत हमारी एकाग्रता को बढाता है।
  • संगीत सुनने से हमारी सोच में सकारात्मक बदलाव आता है। और हम हर कार्य को अच्छी सोच के साथ करते हैं।
  • संगीत की धुने हमारे शरीर की हृदय गति और सांसों को भी नियंत्रित रखती है जिससे हम कई तरह की बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

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