मुर्गी पालन कैसे करें – जानकारी और फायदे

भारत में पुराने समय से ग्रामीण इलाकों में मुर्गीयों को पाला जाता रहा है। लेकिन आज के इस दौर में मुर्गी पालन एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभर गया है जो किसानों की जीविकापार्जन का प्रमुख साधन बन गया है। मुर्गीपालन से  बेरोजगारी की समस्या पूरी तरह से दूर हो सकती है। एसे युवा मुर्गीपालन को रोजगार बना सकते हैं जो बेरोजगारी का जीवन जी रहे हैं। यदि आप मुर्गीपालन को सही और उन्नत तरीके से कर सकते हैं तो यह कम खर्च में अधिक आय दे सकती है। मुर्गी पालन में जैविक सुरक्षा का नियम और ब्रायलर फार्म की जरूरत होती है। और मुर्गी पालन में आपको कुछ तकनीकी बातों के बारे में पता होना चाहिए । मुर्गी पालन कैसे करें – जानकारी और फायदे

मुर्गी पालन ( Murgi Palan ) का उददेश्य

  • अंडे और मांस में उच्च कोटी के प्रोटीन होना। और उसे उपलब्ध करवाना।
  • गुर्गी पालन को बढ़ावा देना।
  • गुर्गी पालन में आर्थिक विकास दर सुनिश्चित करवाना।
  • ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर प्रदान करवाना।
  • कम लागत में अच्छी खाद तैयार करना।

कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां गुर्गीपालन शुरू करने से पहले 

  • गुर्गी पालन करने के लिए पहले इसे छोटे स्तर के रूप शुरू करें। फिर बाद में बड़े फार्म में विकसित करवाना।
  • चूजे हमेंशा विश्वसनीय और प्रमाणित हेचरी से ही लें।
  • गुर्गी फार्म खोलने से पहले आप किसी कृषि जानकार से सलाह जरूर लें।

भारत में मुर्गीपालन का व्यवसाय में आठ से दस प्रतिशत की वार्षिक औसत विकास की दर होने की वजह से यह बहुत ही तेजी से विकसित होता हुआ एक प्रमुख क्षेत्र बन रहा है। इसके अलावा भारत अमेरिका और चीन के बाद मांस उत्पादन में पांचवा बड़ा उत्पादक देश बन गया है।
पोल्ट्री व्यवसाय में आप कितना पैसा कमा सकते हैं इसकी कोई समय सीमा नहीं होती है।
मुर्गीपालन व्यवसाय के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो इसके लिए कोई खास योग्यता की अनिवार्यता नहीं होती है। लेकिन यदि आपको जीव विज्ञान और एनिमल साइंस का ज्ञान है तो आपको अधिक फायदा हो सकता है।

मुर्गीपालन व्यवसाय के लिए जरूरी कौशल
पोल्ट्री फार्म के बारे में उचित जानकारी का होना।
मुर्गियों की सेहत की जानकारी रखना।
जैसे किस बिमारी से मुर्गियों को बचाना है।
मेहनत में कोई कमी नहीं करना।
मुर्गियों की रख रखाव की जानकारी रखना।

पोल्ट्री फार्म दो प्रकार के होते हैं।

  1. ब्रायल पोल्ट्री।
  2. पोल्ट्र पालन।

मुर्गी पालन के लाभ ( Murgi Palan ke Labh )

  • आप बहुत ही कम लागत में इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं।
  • इस व्यवसाय में आपको अधिक जमीन व मंहगे भवन की जरूरत नहीं होती है।
  • कोई भी साधारण इंसान इस काम को शुरू कर सकता है।
  • मुर्गी पालन करने से आपको आय के साथ-साथ पौष्टिक आहार भी खाने को मिलता है।
  • खाना खाने के बाद बचा हुआ खाना मुर्गियों को अनाज के रूप में दिया जा सकता है।
  • मुर्गी से मिलने वाली खाद में यूरिया और नाईट्रेट की अधिक मात्रा होती है जिससे इसे आप खेतो में खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हो।
  • मुर्गी उत्पादन से मिलने वाले सामान जैसे मांस और अंडे को बिकने में कोई समस्या नहीं आती है। शहरों में अंडे और मांस की अधिक मांग रहती है।

 

मुर्गी पालन के लिए कैसे जगह हो।

  • मुर्गी पालन की जगह मेन रोड़ और शहर से बाहर होनी चाहिए।
  • बिजली की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
  • फार्म हमेशा उंचाई वाली जगह पर होना चाहिए।
  • दो पोल्ट्री फार्म एक दूसरे के पास में नहीं होना चाहिए।
  • फार्म की लंबाई पूरब से पश्चिम की ओर होना चाहिए।
  • मध्य में उंचाई 12 फीट और साइड 8 फीट उंची होनी चाहिए।
  •  चौड़ाई 25 फीट और शेड का अंतर कम से कम बीस फीट होना चाहिए।
  • मुर्गियों के शेड और बर्तनों की साफ सफाई हमेशा करते रहें।
  • एक शेड में केवल एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए।

 

फार्म में प्रयोग आने वाले यंत्र

  1. दाने फीडर
  2. पानी के बर्तन
  3. ब्रुड
  4. अंडे की ट्रे
  5. चोंच काटने वाला यंत्र
  6. टीकाकरण के लिए वैक्सीनेटर आदि।

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आहार

  • मुर्गी पालन में सबसे ज्यादा खर्च उनके दाने पर होता है।
  • चूजों के लिए बाजार में फिनिशर और स्टार्टर राशन मिलता है।
  • दाने में प्रोटीन और इसकी गुणवत्ता का भी ध्यान रखना जरूरी है।
  • इसके अलावा आप चूजों को मक्का, सूरजमुखी, तिल, मूंगफली, जौ और गेूंह आदि को भी दे सकते हो।

गर्मियों के समय में मुर्गी पालन करने वाले लोगों को चाहिए कि वे मुर्गियों को तेज तापमान और अधिक गर्मी से बचाय जाए। मौसम में बदलाव की वजह से मुर्गियों की मौत तक हो सकती है।
इस वह से मुर्गी पालन करने वालों को अधिक हानि हो सकती है।

इसलिए  मुर्गियों की छत का गर्मी से बचाने के लिए छत पर घास व पुआल आदि को डाल सकते हैं। या छत पर सफेदी करवा सकते हैं। सफेद रंग की सफेदी से छत ठंडी रहती है। साथ ही आप र्मुिर्गयों के डेरे पर पंखा आदि को भी लगा सकते हैं।

मुर्गियों को चारा गीला करके देना चाहिए। मुर्गियां गीला दाना अधिक से अधिक खाती हैं। ध्यान रखें कि गीला दाना  शाम तक खत्म हो जाए नहीं तो उससे बदबू आ सकती है।

मुर्गियों चूजों में बीमारियां और उनसे बचाव 

मुर्गियों में कई तरह की बीमारियां पाई जाती हैं। जैसे पुलोराम, रानीखेत, हैजा, मैरेक्स, टाईफाइड और परजीविकृमी आदि रोग होते हैं। जिससे मुर्गीपालकों को हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

 

उपचार

  • चूजों को रखने से पहले शेड को अच्छे से साफ करें।
  • गर्मियों में चूजों के लिए पानी के बर्तनों की संख्या को बढ़ा दें। क्योकि गर्मियों में पानी न मिलने से हीट स्ट्रोक लगने से मुर्गियों की मौत हो जाती है।
  • जब तेज गर्मी होती है तब शेड की खिड़कियों पर टाट को गीला करके लटका दें। लेकिन इस बात का ध्यान जरूर रखें कि टाट खिड़कियों से न चिपके।
  • गर्मियों में पानी में गुड और विटामिन मिलाकर मुर्गियों को देना चाहिए।
  • मुर्गियों को दाना इस तरह से दें कि वह शाम तक खत्म हो जाए। अन्यथा उसे फैंके दें।
  • यदि मुर्गियों में गर्मी के लक्षण दिखाई दें तो आप उसे उठाकर पानी में एक डुबकी लगवा दें और उन्हें छाव में रखने के बाद शेड में रख लें। इस काम को बहुत तेजी से करें। नहीं तो मुर्गी मर भी सकती है।
  • मुर्गियों में कैल्शियम की कमी होने लगती है ऐसे में उन्हें शैल ग्रिट, चूने का पत्थर तीन से चार प्रतिशत और चाक आदि अलग से खिलाना चाहिए।

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