मटका खाद कैसे बनाये और फायदे

खाद खेतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि आप प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करते हो तो इससे आपकी खेती की उपज भी बढ़ेगी और आपको अधिक लाभ भी मिलेगा। वैदिक वाटिका आपके बता रही है मटका खाद के बारे में। बेहद आसान तरीकों से आप अपने घर में मटका खाद बना सकते हो।

मटका खाद की विशेषतायें

  • मटका खाद घर के आस-पास मौजूद चीजों से तैयार की जाती है।
  • यह बेहद सस्ती और सरल तकनीक से बनाई जाती है जो बेहद प्रभावशाली है।
  • इस खाद से जमीन में जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है।
  • पौधे अच्छी तरह से उगते हैं।
  • फसलें भी अच्छी गुणवत्ता वाली होती हैं।
  • मटका खाद के इस्तेमाल से आप रसायनिक खादों के इस्तेमाल से बच जाते हो।
  • खेत में उर्वरा शक्ति बढ़ती है जिससे आपका उत्पादन भी बढ़ता है।

 

मटका खाद बनाने के लिए जरूरी चीजें

मटका खाद की ये मात्रा एक बीघा खेत के हिसाब से है।

  • मटका या प्लास्टिक का पात्र
  • पानी 15 लीटर
  • गुड 250 ग्राम
  • गाय का ताजा गोबर 15 किलोग्राम
  • गौमूत्र 15 लीटर

 

 

बनाने का तरीका

  • सबसे पहले आप मटके के पात्र में 250 ग्राम गुड को पंद्रह लीटर पानी में मिला कर घोल बना लीजिए।
  • अब इस मटके के पात्र में गोमूत्र डालकर अच्छे से हिला दीजिये।
  • अब आप इसे किसी डण्डें से कम से कम पांच मिनट तक घुमाएं। पहले दो मिनट तक सीधा घुमाएं और फिर तीन मिनट तक उल्टा घुमाएं।
  • अब इस घड़े का मुंह बंद कर लें और मटके के उपर ढक्कन रखें और उसे भी उपर से मिट्टी और गोबर से लीप दें।
  • इसके बाद इस मटके को दस दिनों के लिए छाया में रखें।
  • दस दिनों के बाद आपकी मटका खाद तैयार हो जाएगी।
  • इस मटके से अब खाद को निकाल कर किसी ड्रम में रख दें और इसके उपर 150 लीटर पानी डालकर इसे आधे घंटे तक अच्छे से धुमायें।

 

कैसे करें इसका इसका प्रयोग

इस खाद का एक बीधा खेत में छिडकाव करें।

पहला छिड़काव बुआई करने से दो दिन पहले और दूसरा छिड़काव 60 दिनों के बाद करें। और तीसरा छिड़काव फूल आने से पहले कीजिए।

ध्यान दें

मटका खाद बनने के बाद इसक इस्तेमाल दो या तीन दिन में करना जरूरी है।

जब आप दूसरा और तीसरा छिड़काव करें तब  फिर से इस खाद को बनाएं।

फसल के हिसाब से इस्तेमाल 

एक बीघा खेत में दो सौ लीटर पानी के साथ तीस लीटर मटका खाद को मिलाकर फसलों की जड़ों के पास इसका छिड़काव करें।

जब भी आप मटका खाद को खेत में डालें इसके लिए आपकी खेत की जमीन में नमी होनी चाहिए।

अनाज वाली फसलों के लिए बुआई के 25 दिन, 50 दिन पर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें।

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