जनेऊ पहनने के लाभ

हिदू धर्म ग्रंथों में जनेऊ पहने के नियम के बारे में बताया गया है। जनेऊ तीन धागों से मिलकर बना हुआ होता है। जो खासतौर से पुरूषों के लिए ही बनता है। बच्चे को दस साल की अवस्था में जनेऊ पहनाया जाता है या शादी के बाद जनेऊ पहनाया जाता है। जनेऊ धारण करने के बाद इंसान प्राकृति के एक एैसे नियम में बंध जाता है जो कई रोगों से उसकी रक्षा करती है। आधुनिक लोग जनेऊ को नहीं पहनते हैं। वे इसे बकवास और बेकार समझते हैं। भारत के ग्रथों पर हुए रिसर्च के आधार पर विदेशी वैज्ञानिकों ने जनेऊ धारण करने के पीछे कई चौंका देने वाली बाते कही हैं। वैदिक वाटिका आपको बता रही है जनेऊ के वैज्ञानिक दृष्टि से क्या लाभ मिलते हैं। और क्यों इसे धारण करना चाहिए।
जनेऊ को भारत में प्राचीन समय से ही पहना जाता रहा है। जनेऊ को कान पर तब बांधा जाता है जब इंसान शौच आदि के लिए जाता है।

जनेऊ को कान पर बांधने से इंसान का दिमाग तेज और स्मरण शक्ति भी बढ़ती है। क्योंकि जब जनेऊ को कान पर बांधा जाता है तब कानों की नसों पर दबाब पड़ता है और जब नंसे दबती है तब पेट से कब्ज और आंतो से संबंधित रोग नहीं होते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार जब जनेऊ दिल के सामने से गुजरता है तब इससे दिल से संबंधित रोग ठीक होते हैं और खून का संचार शरीर में ठीक तरह से होता है।
कई तरह की बीमारियों से बचाना
जब जनेऊ पहना जाता है तब इंसान को शरीर का ध्यान रखना पड़ता है। जब इंसान शौच आदि के लिए जाता है तब जनेऊ को कानों पर टांगना जरूरी होता है। इससे शरीर में संक्रमण रोग, दांत में कीड़े और कृमि रोग शरीर को नहीं लगते हैं।

वीर्यवर्धक होता है
जनेऊ धारण करने से इंसान के अंदर शुक्राणओं की संख्या बढ़ती है। जब जनेऊ को कान में लिपटते हैं तब इससे जो नसें दबती हैं वे सीधी पुरूषों के गुप्तागों से जुड़ी हुई होती हैं।

गलत कामों से इंसान बचता है
जनेऊ पहनने से सीधा आपके दिमाग पर असर पड़ता है जो हर बात पर आपके दिमाग को सचेत करता है। क्या गलत है क्या सही है इससे इंसान को समझ देता रहता है। ये सभी तरह के अहसास इंसान को होते रहते हैं।

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