उच्च रक्तचाप को कैसे नियंत्रित करें

जब शरीर में रक्त दाब अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है तो उसे उच्च रक्तचाप (high blood pressure)  का रोग कहा जाता है। जिसकी वजह से दिल की धमनियां मोटी हो जाती हैं। और इस वजह से रक्त प्रवाह में अवरोध होता हैं। उच्च रक्तचाप के कारणों को जानना भी अति आवश्यक है। इस रोग के मुख्य कारण हैं- मोटापा, तनाव, मानसिक श्रम अधिक करना, मादक पदार्थों का सेवन करना, डायबिटीज आदि हैं।

आइये जानते हैं उच्च रक्तचाप के लक्षण क्या होते हैं। इस रोग में रोगी को सिरदर्द का अधिक होना, दिल की धड़कनों का बढ़ना, अजीर्ण आना, नींद न आना, थोड़े से ही परिश्रम में ही सांसों का फूलना, बार-बार पेशाब आना आदि लक्षण पाए जाते हैं। उच्च रक्तचाप दो तरह का होता है। स्थायी और अस्थायी। स्थायी रक्तचाप में नकसीर बहना, अफारा, एैसा लगना की सांस बंद हो रही है,घबराहट आदि। अस्थायी रक्त चाप के लक्षणों में जैसे सिर का भारी लगना, नींद न आना, दिल की धड़कनों का तेज होना आदि।

उच्च रक्तचाप को नियंत्रित तभी किया जा सकता है जब रोगी उचित परहेज करे। आइये अब आपको बताते हैं कि कैसे उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है।

1. 7 से 10 मुनक्कों को रात को एक कप पानी में भिगो लें और फिर सुबह खाली पेट इनका सेवन करें, साथ ही मुनक्कों के बचे पानी को भी पीते रहें। कुछ दिनों तक लगातार एैसा करने से उच्च रक्तचाप दूर हो सकता है।

2. उच्च रक्तचाप को दूर करने में फलों और सब्जियों की भूमिका अहम रहती है। आप इन फलों और सब्जियों का प्रयोग कर सकते हो जैसे पपीता, टमाटर, आंवला, पुदीना, चैलाई, शहद, छाछ, अरबी, पेठा, आलू, टिण्डा, ककड़ी आदि। इन का प्रयोग अधिक से अधिक करें। एैसा करने से भी उच्च रक्तचाप को दूर किया जा सकता हैं।

3. सुबह उठकर खाली पेट कुछ दिनों तक नीम की 20 से 25 ग्राम पत्तियों का रस पीते रहने से उच्च रक्तचाप दूर हो सकता है।

4. लहसुन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। 6 से 7 बूंदें लहसुन रस में 3 चम्मच पानी मिलाकर दिन में चार बार पीते रहने से हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है।

5. थोड़े से पानी में आधा कप लौकी का रस मिलाकर दिन में 3 बार लेने से कुछ ही समय में इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है।

6. छाछ में नमक और हींग मिलाकर पीते रहने से कुछ ही दिनों में उच्च रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता हैं।

7. सुबह उठकर खाली पेट आप पानी गरम करें फिर उसमें नींबू के रस को मिलायें और नित्य कुछ दिनों तक एैसा करें। यह एक कारगर वैदिक उपाय भी है।

8. उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में केले का तना भी अहम भूमिका निभाता है। आप केले के तने का आधा कप रस दिन में दो बार रोज पीयें। यह कुछ दिनों में आपके ब्लडप्रेशर को लेवल कर देगा।

9. लाल गाजर का रस और पालक का रस मिलाकर रोज पीने से रक्तचाप दूर किया जा सकता है। पालक का 120 ग्राम और गाजर का 300 ग्राम रस होना चाहिए।

10. दूध भी उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करता है। गाय का दूध का सेवन सुबह और शाम नित्य करें।

ब्लडप्रेशर का बढ़ना खतरे का संकेत होता है। यदि सही समय पर परहेज नहीं किया गया तो आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इन आयुर्वेदिक उपायों से आप इस बीमारी को नियंत्रित कर सकते हो लेकिन ध्यान रखें परहेज जरूर करें। बाहर का खाना हो सके तो कम से कम खायें। और सुबह 2 से 3 कि.मी पैदल चलें।
 
image credit-gettyimages.in

sehatsansar youtube subscribe
डिसक्लेमर : sehatsansar.com में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी sehatsansar.com की नहीं है। sehatsansar.com में दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलह लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।