नमाज के तरीकों में छिपा है सेहत का राज

नमाज अदा करना भी अपने आप में एक योग है जो कई तरह की  बीमारियों को ठीक कर सकता है। नमाज करते वक्त शरीर में जो बदलाव आते हैं वे बहुत हद तक सूर्यनमस्कार की कई आसनों से मिलती जुलते हैं। हर आसन शरीर के 7 चक्रों को सक्रिय करता है। वैदिक वाटिका आपको बताएगा कैसे नमाज के तरीके शरीर को स्वस्थ और निरोगी बना सकते हैं।

नमाज पढ़ने के 5 तरीकें होते हैं अल कैयाम, तकबीर, रूकू, सजूद और जुलस।

आइये अब जानते हैं इन तरीको से कैसे शरीर ठीक रह सकता है।

अल कैयाम और तकबीर एक साथ मिलकर योग का एक आसन बनाते हैं जिसे पर्वत आसन कहते हैं। यह आसन शरीर में संतुलन लाने के साथ ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखता है। नमाज के ये दो तरीके दिल के मरीजों और दमा से परेशान लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। अल कैयाम और तकबीर करने से इन बीमारियो से निजात मिलता है ।

रूकू
यह नमाज करने का तीसरा तरीका है जो अपने आप में एक योग आसन की तरह है। रूकू करते समय शरीर के निचली जगहों और मांसपेशियों में तनाव के साथ जांघों पर भी खिंचाव पड़ता है जिस वजह से शरीर में खून का संचार तेजी से होता है। यह आसन जांघों, मांसपेशियों और पेट को टोन रखता है।

 जुलस और सजूद

जुलस करने से शरीर की पाचन शक्ति ठीक बनती है। यह पेट संबंधी बीमारियों को ठीक करता है साथ ही पैरों और जांघों को मजबूत बनाता है। वहीं सजूद करने से दिमाग को ताकत मिलती है साथ ही साथ यह मस्तिष्क तक खून को सही मात्रा में पहुंचाता है।

नमाज अदा करने से भी कई तरह की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। नमाज में किए जाने वाली ये सभी आसन सूर्य नमस्कार से काफि हद तक मिलते जुलते हैं।

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