हर्पीस जोस्टर ट्रीटमेंट – घरेलू उपाचार

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हर्पीस को अंग्रेजी में जोस्टर कहा जाता है। यह बीमारी बहुत ही खतरनाक होती है। यह रोग हर्पीस नाम के वायरस की वजह से होता है। यह ऐसा वायरस होता है जो त्वचा पर दर्दयुक्त घाव उत्पन्न करता है।  चालीस साल की उम्र के बाद इस रोग के होने की संभावना अधिक हो जाती है।
इस रोग में चेहरे व त्वचा पर पानी के भरे हुए छोटे छोटे दाने निकलने लगते हैं जिससे इंसान के शरीर के एक ही हिस्से में काफी सारे दाने निकल जाते हैं। हर्पीस की बीमारी में पथरी की तरह दर्द होता है। यह दो प्रकार का होता है जेनिटल हर्पीस और ओरल हर्पीस।
यह रोग ज्यादातर उन लोगों को होता है। जिन्हें चिकन पाॅक्स हुआ हो। हर्पीस रोग दो से तीन हफ्तों में ठीक हो जाता है लेकिन कई बार यह लौटकर भी आ जाता है।

रोग क्यों होता है?

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम होने की वजह से
शरीर का कमजोर होना,शरीर के एक तरफ जलन,
लगातार खुजली,मरोड़ आदि।

हर्पीस जोस्टर  की बीमारी को पूरी तरह से  घरेलू उपायों के जरिए ठीक किया जा सकता है। आइये विस्तार से जानते हैं हर्पीस जोस्टर के घरेलू उपाय के बारे में।

हर्पीस का घरेलू उपाचार

बर्फ का पैक

हर्पीस से प्रभावित जगह पर बर्फ का बना पैक लगाना चाहिए। बर्फ को किसी कपड़े या किसी पन्नी में डालकर लगाएं। इससे हर्पीस तेजी से ठीक होता है। ध्यान रहे बर्फ का इस्तेमाल सीधे त्वचा पर ना करें। बर्फ को प्रभावित क्षेत्र पर लगाने से आपको दर्द और खुजली से राहत मिलती है।

बेकिंग सोड़ा का इस्तेमाल

बेकिंग सोड़े को आप पानी में मिलाकर इसे रूई में डुबोकर हर्पिस वाली जगह पर लगाएं। बेकिंग सोड़ा कीटाणुओं काे खत्म करता है। और हर्पिस की वजह से होने वाली खुजली और दर्द से भी आराम देता है।

लेमन बाम का प्रयोग

हर्पीस वायरस को रोकने की एक कारगर और बेहतरीन औषधि है लेमन का बाम। लेमन बाम को हर्पीस वाली जगह पर लगा के आप इस रोग से आराम पा सकते हो।

शहद का प्रयोग

शहद भी एक बेहतरीन औषधि है हर्पीस की बीमारी से बचने की। नियमित रूप से यदि आप शहद को हर्पीस से प्रभावित जगह पर लगाते हैं तो आप इस बीमारी से आराम पा सकते हो।

एलोवीरा का इस्तेमाल

एक प्राकृतिक और घरेलू नुस्खे के तौर पर जाना जाता है एलोवीरा को।  हर्पीस की बीमारी में भी एलोवीरा जेल बहुत ही बेहतर तरीके से काम करती है। जब  आप नियमित रूप से  एलोवीरा के पेस्ट को हर्पीस से प्रभावित जगह पर लगते हो तब इससे  आपकी यह बीमारी जल्दी ठीक होती है। क्योंकि एलेवेरा में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो शारीरिक बीमारियों को ठीक करने में सहायक होते हैं।

मुलेठी की  जड़ का उपयोग

मुलैठी की जड़ से बना चूर्ण हर्पीस की बीमारी को ठीक कर सकता है। मुलैठी की जड़ में कई तरह के एंटीआॅक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। जो हर्पीस की बीमारी में बहुत ही सहायक सिद्द होती है।

जैतून का तेल

हर्पीस जोस्टर के घरेलू  उपचार में जैतून का तेल बहुत फायदेमंद होता है   जेतून का तेल त्वचा से संबंधित रोगों को ठीक करता है। क्योंकि जैतून के तेल में भी एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो त्वचा के अंदर जाकर काम करते हैं। हर्पीस से ग्रसित हिस्सों पर  जब आप जैतून के तेल को लगाने से यह रोग धीरे.धीरे ठीक होने लगता है।

एंटीवायरल पेपरमिंट तेल

हर्पीस के वायरस को जड़ से खत्म कर देता है पेपरमिंट तेल में मौजूद एंटीवायरल तत्व। यही नहीं हर्पीस से होने वाले भंयकर दर्द से भी राहत देता है यह तेल। आपको बाजार में आसानी से मिल सकता है पेपरमिंट आॅइल।

टी ट्री तेल का इस्तेमाल

टी ट्री आयल भी आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा। यह तेल हर्पीस से होने वाले इंन्फेक्शन को खत्म कर देता है। साथ ही साथ दर्द और खुजली को भी खत्म करता है। टी ट्री आॅयल हर्पीस के संक्रमण को समाप्त करता है।

ढीले कपड़े पहने

हर्पीस जोस्टर होने पर रोगी को ढीले कपड़े पहनने चाहिए। इससे उत्तेजित त्वचा पर कपड़ों की रगड़ नहीं लगती।

योग और व्यायाम

हर्पीस बीमारी को दूर करने के लिए एरोबिक योग करने चाहिए जैसे तैरना, साइकिल चलाना, पैदल चलना आदि।

सावधानी

हर्पीस की बीमारी में शक्कर, रिफाइड आदि से दूरी बना कर रखनी चाहिए। अगर आपको अधिक खुजली हो रही हो तो प्रभावित क्षेत्र पर गीली पत्तियां, बर्फ या गुनगुने पानी का प्रयोग करना चाहिए। इसको खुलजी होने पर खुजलना नहीं चाहिए।
वैसे तो इन प्राकृति उपायों से यह रोग ठीक हो सकता है। लेकिन यदि हर्पीस बीमारी से यदि इंसान काफी लंबे समय से ग्रसित है तो वह अपने को डाॅक्टर से जरूर दिखाए। समय पर इलाज से यह रोग ठीक हो सकता है नहीं तो यह बीमारी इंसान को बहुत सारी परेशानी भी दे सकती है।

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