गुलर के आयुवेर्दिक फायदे

गुलर एक 50 से 60 फुट लंबा पेड़ होता है जो भारत में सभी जगहों पर पाया जाता है। इस पेड़ पर केवल फूल नहीं आते केवल फल ही आता है। इसके फल से सफेद दूध निकलता है। और यह पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। गुलर का फल बहुत मीठा होता है। और यह फल मार्च से जून के महीने में लगता है। गुलर को अनेक नामों से जाना जाता है जैसे उम्बरो, अम्बर, उदम्बर आदि।

आयुर्वेद में गुलर एक एैसी औषधि है जो कई प्रकार के रोगों को खत्म कर देती है। अब जानते हैं गुलर के फायदों के बारे में और इसे किस उम्र के लोग कितनी मात्रा में लें।
गुलर के आयुवेर्दिक लाभ (Ayurvedic Benefits for Ficus Racemosa)

निमोनिया की समस्या में
गूलर को पानी में मिलाकर इसका काढ़ा बनाएं और इसे निमोनिया के रोगी को दें।
डायबिटीज में
गुलर के फल को पीसकर इसका सेवन पानी के साथ करने से इंसान मधुमेह से मुक्त हो जाता है। इस उपाय को नियमित करना चाहिए।

दांतों की समस्या में
दांत संबंधी परेशानी होने पर आप गूलर के दो फलों को पानी मे ंउबालकर इसका काढ़ा बना लें और इससे कुल्ला करें। इससे दांत की समस्या तो ठीक होती ही है साथ ही आपके मसूढ़े और दांत भी स्वस्थ रहते हैं।
नकसीर में
यदि आप नकसीर की समस्या से हमेशा परेशान रहते हैं तो गूलर के फलों को सुखाएं और उन्हें पीस लें और इसे
छान लें फिर उपर से चीनी मिलाकर रोज इसका सेवन करें।

मुंह के छाले होने पर
मुंह में यदि छाले हो गए हों तो आप गूलर के पेड़ से इसकी पत्तियों को लें और इन्हें चूसे। एैसा करने से मुंह के छाले ठीक हो जाएगें।

फोड़ा फुंसी के लिए
यदि फोड़ा या फुंसी हो गया हो तो इस जगह पर गूलर के दूध को लगाएं।

खूनी बवासीर होने पर
यदि किसी को खूनी बवासीर हो गई हो तो उसके लिए गूलर एक कारगर औषधि है। खूनी बवासीर में एक चम्मच पानी में गूलर के दूध की दस बूंद मिलाकर इसका नियमित सेवन करें।
खूनी बवासीर से परेशान इंसान को कच्चे गूलर की सब्जी का सेवन नियमित करना चाहिए।

गूलर के फलों को सुखाकर इसे पीस लें और इसमें चीनी मिलाकर नियमित इसका सेवन करने से खूनी बवासीर जड़ से खत्म होती है।

अब जानते हैं कितनी मात्रा में गूलर का सेवन करना चाहिए :
गूलर की छाल का पांच से दस ग्राम की मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए।
दो से चार गूलर के फलों का सेवन करना चाहिए। बड़ों को गूलर के दूध का केवल दस से बीस बूदों का ही सेवन करना चाहिए। वहीं छोटे बच्चों को गूलर के दूध की पांच बूदें देनी चाहिए।

गूलर की छाल वात, पित्त और कफ तीनों रोगों को ठीक करता है।
गूलर के पेड में पाया जाना वाला दूध जो थोड़ी देर में पीला पड़ जाता है वह इंसान के शरीर के लिए अति उत्तम होता है।

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