गठिया का वैदिक उपचार – घुटनों के दर्द के लिए

घुटनों के आर्थराईटिस को ओस्टियो आर्थराईटिस कहा जाता है। घुटनों पर होने वाला गठिया 50 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं और पुरूषों को होने लगता है। जिस वजह से चलने फिरने में काफी परेशानी आती है। इसके अलावा घुटनों को होने वाला गठिया के अन्य कारण भी होते हैं जैसे जोड़ों की हड्डि टूटनाए पैर के घुटने में चोट लगना और अधिक समय तक खड़े रहकर काम करना आदि। लेकिन अब आप परेशान ना हों आपकी वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे घुटनों के गठिया के दर्द से राहत पाई जा सकती है।

सबसे पहले जानते हैं घुटनों के आर्थराइटिस यानि गठिया के लक्षण

  • घुटनों में दर्द रहना
  • चलने फिरने में दिक्कत आना
  • घुटनों में अकड़न का आना
  • एैसा लगना कि बस अब चला नहीं जा सकता है आदि।

घुटनों के आर्थराइटिस के वैदिक उपचार के लिए आप इन चीजों को करें

वजन पर नियंत्रण रखें। अपना वजन बढ़ने ना दें। क्योंकि वजन बढ़ने से शरीर का भार घुटनों पर आ जाता है। और जब आप किसी सामान को उठाते हैं तब सारा जोर आपके घुटनों पर पड़ जाता है।

वजन घटाने के लिए नियमित एैसा व्यायाम करें जिसमें आपको किसी तरह से पैरों का इस्तेमाल ना करना पड़े।

इसके अलावा आप चलने के लिए एक ही बैसाखी का इस्तेमाल करें।

इन उपचारों से आपको घुटनों के आर्थराईटिस से राहत मिल सकती है लेकिन इसके अलावा अन्य विकल्प भी हैं।

घुटनों के आर्थराईटिस की जांच डाॅक्टर एक्स रे के जरिए करते हैं। और यदि पता चलता है कि आपको घुटनों का आर्थराईटिस है तो डाॅक्टर आपको लक्ष्णों के हिसाब से अलग-अलग तरह के इलाज बताएगें। जिसमें आॅपरेशन भी एक मात्र उपचार हो सकता है। इसलिए अपने डाॅक्टर से विचार पूरी तरह से करें।

इसके अलावा यदि घुटनों में गठिया की समस्या बहुत बढ़ गई हो तो डाॅक्टर इसके लिए घुटनों को सर्जरी के जिरए बदलते हैं। जिन लोगों को कम उम्र में घुटनों में गठिया की शिकायत हो जाती है उनके लिए यह सर्जरी जरूरी भी हो सकती है। इस सर्जरी में घुटने के भाग को बदलकर उसमें प्लास्टिक या धातु से बनी कटोरीनुमा वस्तु को घुटनाें के उपर लगाया जाता है।

समय.समय पर यदि आप अपने घुटनों के दर्द को चिकित्सक को दिखाते हैं और शुरू में ही घुटनों के आर्थराईटिस का पता चलते है फिर आसानी से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

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