गर्दन के दर्द का इलाज – एक्यूप्रेशर द्वारा

गर्दन में दर्द की समस्या आजकल बहुत लोगों में देखने को मिल रही है। स्कूल के बच्चों से लेकर आॅफिस में काम करने वाले लोगों को गर्दन के सर्वाकइल की समस्या हो रही है। बाजू की नसों में दर्द, गर्दन में दर्द, जकड़न महसूस होना और कंधों में दर्द आदि का होना सर्वाइकल रोग के मुख्य लक्षण होते हैं। वैदिक वाटिका आपको बता रही है कैसे आप एक्यूप्रेशर की मदद से गर्दन के दर्द से निजात पा सकते हो।

गर्दन दर्दर: सर्वाइकल के लक्षण और कारण
अधिक समय तक कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल, सिलाई व कढ़ाई-बुनाई , लेटकर पढ़ने वाले लोगों को गर्दन का दर्द या सर्वाइकल हो सकता है। इसके अलावा गर्दन का दर्द उन लोगों को भी हो सकता है जो वाहन चलाते हैं, अधिक बोझ उठाते हैं और जिन लोगों को मानसिक रोग है।

सर्वाइकल के लक्षण

गर्दन दर्द के मुख्य लक्षण इस तरह हैं

  • गर्दन में लगातार दर्द होना
  • हाथ हिलाने व गर्दन को घुमाने में दर्द होना
  • गर्दन को उपर-नीचे करते वक्त दर्द होना
  • करवट बदलने पर दर्द होना
  • गर्दन का स्थिर होना
  • गर्दन के पीछे सूजन होना आदि मुख्य लक्षण होते हैं सर्वाइकल के।

गर्दन में दर्द होने से बाजुओं से लेकर कंधों तक दर्द होता रहता है। एैसे में हाथों में इन सभी के मुख्य बिंदु होते हैं। जिन्हें पहले चित्र में आपको दिखाया गया है।
इन बिंदुओं को तब दबाएं जब कंधे जकड़ जाते हैं या गर्दन व बाजू में दर्द होने लगता है। और गर्दन व बाजू को मोड़ते समय दर्द हो रहा हो। इन बिंदुओं को दबाने से आपको दर्द में काफी राहत मिलेगी।

चित्र दो
दूसरे चित्र के अनुसार आप हाथों और पैरों के बाहरी और भीतरी हिस्से को दबाएं।

चित्र तीन
सर्वाइकल के दर्द से बचने के लिए आप हाथ और पैर के उपरी भाग को दबाएं। जब गर्दन के उपरी हिस्से में दर्द हो रहा हो तब अंगूठों का नीचे का भाग दबाएं।

गर्दन के दर्द से राहत पाने के लिए इन बिंदुओं को दिन में तीन बार कम से कम दो से तीन मिनट तक दबाएं।

sehatsansar youtube subscribe
डिसक्लेमर : sehatsansar.com में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी sehatsansar.com की नहीं है। sehatsansar.com में दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलह लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।