फोड़े फुंसी होने के कारण और घरेलू उपचार

फोड़े फुंसी होने के कारण और घरेलू उपचार

आज हम बात करेगें फोड़े फुंसी होने के कारण और घरेलू उपचार के बारे में। जी हाँ फोड़े फुंसी भले ही दिखने में काफी छोटे लगते हैं। लेकिन अगर आप इसका उपचार सही समय पर न किया जाए तो यह एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है। त्वचा पर फोड़े फुंसी होने के मुख्यतः दो कारण होते हैं एक संक्रमण और दूसरा कारण शरीर में गर्मी का बढ़ना।

जब भी फुंसी होती हैं तब शुरू में दर्द होता है और कुछ समय बाद इसमें पीक पैदा हो जाती है। शरीर पर कुछ फुंसियां तो ऐसी होती है जो अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ पकने के बाद कड़ी हो जाती है। इनमें कील पैदा हो जाती है जो मवाद के साथ ही बाहर आती है जब यह कील निकल जाती हैं तब बाद में दर्द तथा जलन नहीं रहती। अगर आपके शरीर पर बार बार फोड़े फुंसी होती है तब इसका कारण किसी चीज से एलर्जी होना भी हो सकता है।

जिसका उपचार केवल एलर्जी उत्पन्न करने वाली चीज से दूर रहने से ही होता है। उस पर अधिकतर मामलों में दवा या घरेलू उपचार कामयाब नहीं होते। आइये जानते हैं फोड़े फुंसी होने के कारण और घरेलू उपचार के बारे में।

फोड़े फुंसी होने के कारण

  • शरीर पर फोड़े फुंसी होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि
  • गंदे पानी का सेवन या गंदे पानी से नहाना,
  • बरसात में अधिक आम खाने से और फ़ो से भी फोड़े फुंसी उत्पन्न होते हैं,
  • किसी कीट पतंगे या मच्छर के काटने से,
  • आसपास का प्रदूषित वातावरण,
  • जाँघों से बाल के साथ दूसरा बाल निकलने की कोशिश करने से बाल तोड़ हो सकता है। जिससे फोड़ा बन जाता है।
  • कीटाणुओं के संक्रमण होने से,
  • रक्त में खराबी होने से,
  • गर्मियों में अधिक गर्म चीजों का सेवन करने से जैसे गुड, तेज मसाले, चाय आदि,
  • विभिन्न बीमारियों में खाई जाने वाली दवाओं के साइड इफ़ेक्ट के रूप में भी फोड़े फुंसी हो जाती है।

फोड़े फुंसी होने पर घरेलू उपचार

नीम के पत्तों का प्रयोग

  • फोड़े फुंसी के घरेलू उपचार में मुख्य रूप से नीम सबसे महत्वपूर्ण होता है। नीम में एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण फोड़े फुंसी के लिए उपयोगी है। इसलिए इनके उपचार के लिए बनने वाली आधुनिक दवाओं तथा क्रीम में भी अधिकतर रूप से इसका इस्तेमाल किया जाता है। फोड़े फुंसी होने पर नीम के पत्तों का पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को संक्रमित हिस्से पर लगाएं इसके इलावा नीम की पत्तियों को उबालकर इसका पेस्ट तैयार करें और इस पेस्ट को कुछ समय के लिए फोड़े पर लगा रहने दें। अब इसे पानी से धो लें। इस प्रकार दिन में कई बार करें आपको फर्क खुद नजर आने लगेगा।
  • नीम की छाल को किसी पत्थर पर थोड़े से पानी के साथ घिस कर पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को फोड़े फुंसी पर लगाएं इससे आपकी फुंसी ठीक हो जाएगी।
  • नीम के पत्तों से निकला हुआ रस पानी में मिला कर नियमित सेवन करने से लाभ मिलता है।
  • नीम के पत्ते पानी में उबाल कर इस पानी से नहाने से त्वचा की लगभग सभी संक्रमण से छुटकारा मिलता है।

त्वचा के रोगों से बचाव तथा खून साफ़ करने के लिए

मार्च अप्रैल में जब नीम के पेड़ो पे नई नई कोंपलें आने लगे तो इक्कीस दिनों तक सवेरे बिना कुछ खाएं पिए मुंह साफ़ करने के बाद ताजा कोंपलें हर रोज चबाकर खाने या गोली बनाकर निगल लेने से खून की खराबियां, फोड़े फुंसी सहित विभिन्न प्रकार के चर्म रोगी से साल भर के लिए बचाव हो जाता है। हैल्दी स्किन चाहिए तो जरुर खाएं ये आहार

इसका सेवन करने से मलेरिया तथा बुखार आदि बीमारी होने की संभावना भी खत्म हो जाती है। इस प्रयोग के साथ ध्यान रखने की बात यह हैं कि खाली पेट कोंपलें खाने के बाद लगभग दो घंटे तक कुछ भी न खाएं।

टी ट्री आयल

टी ट्री आयल में एंटी माइक्रोबियल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह न केवल आपको फोड़े फुंसी से राहत दिलाते हैं बल्कि सके होने की संभावना को भी कम कर देते हैं। यह तेल आपको बाजार से आसानी से मिल जाता है। रुई की सहायता से इसे फोड़े पर लगाएं। इस प्रकार कुछ दिनों तक दिन में पांच से छ: बार करें।

अलसी और पीपल की छाल का प्रयोग

अलसी और पीपल की छाल को मिलाकर अच्छे से कूट लें। फिर इसे गर्म करके फोड़ा या बालतोड़ के स्थान पर रखकर पट्टी से बाँध लें। दो से तीन दिन में कील निकलने के बाद बालतोड़ या फोड़ा फुंसी सूख जाएगी।

पीपल की छाल का प्रयोग

पीपल की छाल के चूर्ण में काला जीरा पीसकर मिला लें। अब इसमें थोडा सा सरसों का तेल मिला लें और इसे फोड़े वाले स्थान पर लगाएं। आपका फोड़ा ठीक हो जायेगा।

पीपल के पत्ते का प्रयोग

पीपल के पत्ते को देशी घी से चिकना कर लें। उसके बाद उसे गर्म करके गुनगुना पीड़ित स्थान पर रखकर पट्टी से बाँध दें। पीपल की कोंपले को पीस कर शहद में मिला लें। इस शहद को फोड़े फुंसी वाले स्थान पर रखकर पट्टी बाँध दें। दुसरे दिन इसे निकाल कर दूसरा बाँध लें। कुछ दिनों में यह सुख कर ठीक हो जायेगा।

हल्दी का प्रयोग

हल्दी में सुजन के खिलाफ काम करने की प्रवृति होती है। जब आप गर्म दूध में हल्दी को मिलाकर पीते हो तब आपको फोड़े फुंसी से निजात मिल जाती है। हल्दी और अदरक का पेस्ट बनाकर फोड़े पर लगाने से भी लाभ मिलता है। इस पेस्ट का प्रयोग कुछ दिनों तक नियमित रूप से करना चाहिए।

प्याज का प्रयोग

फोड़े फुंसी होने पर प्याज का एक टुकड़ा लें और उसे फोड़े वाले स्थान पर रखकर कपड़े के एक टुकड़े से बांध लें। प्याज से पैदा होने वाली गर्मी से फोड़ा ठीक हो जाता है।

फोड़े को कैसे पकाएं

  • फोड़े को पकाने के लिए गेंहू के आटे में नमक तथा पानी डालें। इसके बाद इसे गर्म करके इसका लेप बना लें और फोड़े पर लगाएं। इसका इस्तेमाल कई बार करें। इससे फोड़ा पककर फुट जाता है।
  • मसूर की दाल को पीसकर उसकी पुल्टिस फोड़े फुंसी पर बाधने से लाभ प्राप्त होता है।
  • ग्वारेपाठे के पत्तों का गूदा गर्म कर जरा सी हल्दी मिला कर पुल्टिस की तरह फोड़े फुंसी या गाँठ पर बाधने से फोड़ा जल्दी पक कर फूट जाता है और मवाद निकल जाता है।
  • गुड, गुग्गल, गोंद और राई को समान मात्रा में लें और उन्हें पीसकर चूर्ण बना लें उसके बाद थोडा पानी मिलाकर और गर्म करके फोड़े फुंसी पर लगाएं। इससे फुंसी जल्द ठीक हो जाती है।
  • गेंदे के फूलों को पानी में उबालकर फोड़े फुंसी को धोने से भी आराम मिलता है।
  • फोड़े फुंसी होने पर नीम तथा अनार के पत्तों का पेस्ट लगाने से भी लाभ मिलता है।
  • फोड़े फुंसी पर तुलसी के फुल, बीज, पत्ते, छाल और जड़ को कूट कर अच्छे से बारीक पाउडर बना लें। इसमें थोडा सा नींबू का रस मिलाकर इसे गाढा लेप बना लें। इसे दाद, खुजली, फोड़े फुंसी आदि पर लगाने से यह रोग दूर हो जाता है।
  • मूली के बीजों को पानी में पीसकर गर्म करें और इसे फोड़े फुंसी पर लगाएं। इससे यह पक जाएगी और जल्दी ठीक हो जाएगी।
  • अरंडी के बीजों की गिरी को पीस लें और उसका लेप फोड़े फुंसी पर लगा कर बाँध लें। कुछ दिनों तक इसे करें आपको फायदा मिलेगा।

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