ये सच जो डॉक्टर मरीज को नहीं बताते

आधुनिक विज्ञान जहां तरक्की कर रहा है वहीं मेडिकल सांइस में भी काफी तरक्की हो चुकी है। लिहाजा लोगों का डाक्टरों पर भरोसा काफी बढ़ गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कई एैसे सच हैं जो डाक्टर आपको जानते हुए भी नहीं बताते हैं। क्योंकि इसका असर सीधा उनके पेशे पर पड़ सकता है। इसलिए कई डाक्टर कई बीमारियों का इलाज पता होने के बावजूद मरीज को कई चीजें नहीं बताते हैं। आखिर क्या हैं ये  सच जिन्हें डाक्टर मरीजों को नहीं बताना चाहते हैं। वैदिक वाटिका आपको एैसे ही  सच को बताने जा रहा है जिसके बारे में आप सभी को पता होना चाहिए।

डायबिटीज
ये बात सच है डायबिटीज दवाइयों के सेवन से बढ़ती है। मधुमेह इंसान के शरीर में इंसुलिन की कमी की वजह से होती है। लेकिन कुछ खास दवाओं की वजह से भी शरीर को डायबिटीज हो सकती है। इन दवाइयों में नींद की दवाई, एंटी डिप्रेसेंट्स, कफ सिरफ और बच्चों को दी जाने वाली एडीएचडी आदि दवाईयां हो सकती हैं। इनकी वजह से भी शरीर में इंसुलिन की कमी हो सकती है। जिससे इंसान को डायबिटीज का इलाज करवाना पड़ जाता है।

वैक्सीन
कई बार डाक्टर वैक्सीन को बे वजह लगा देते हैं। जबकी वैक्सनी किसी खास बीमारी के इलाज के लिए होती है। कई एैसी वैक्सीन्स होती हैं जो बेअसर हो चुकी होती है या फिर वायरस को फैलाती है। कई बार डाक्टर एैसे वक्सीन लगा देते हैं जिनकी वजह से फेफड़ों में इंफेक्शन तक हो सकता है। वैक्सीन इंसान के इम्यूनिटी पावर को धीरे-धीरे कमजोर कर देती है।

कैंसर
कैंसर जानलेवा बीमारी है। यह किसी को भी हो सकता है। चाहे वह पुरूष हो या महिला। कई डाक्टर कैंसर की पूरी वजह का पता न होने पर कैंसर का इलाज शुरू कर देते हैं। महिलाओं के बारे में अक्सर देखा जाता है कि शरीर में कहीं भी गांठ बन जाती है तो डाक्टर इसे कैंसर मानने लगते हैं जबकि कभी-कभी छोटी-मोटी फुंसी की वजह से भी ऐसा हो सकता है। बे्रस्ट के मामले में गांठ बनना डाक्टरों को भी परेशान कर देता है।

ब्लडप्रेशर
ब्लडप्रेशर की दवाईयों से भी कैंसर होने का खतरा हो सकता है। बीपी की दवा से तीन गुना कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। क्योंकि ये दवाएं शरीर में कैल्सियम चैनल ब्लाकर्स की गिनती को बढ़ा देती है जो शरीर की कोशिकाओं को खत्म करने लगती है। जिस वजह से कोशिकाएं कैंसर की गांठ बनाने लगती है।

दवाइंयों के बारे में
हार्ट अटैक के मरीजों को कई बार डाक्टर एस्पिरीन लेने की सलाह देते हैं जिसके सेवन से रोगी को ब्लीडिंग का खतरा हो सकता है। एस्पिरीन ब्लड क्लाट बनने से रोकने के काम आती है। जिससे शरीर के अंदर खून निकलने की संभावना 100 गुणा बढ़ जाती है। इससे शरीर कमजोर होने लगता है। इसलिए कम से कम ही एस्पिरीन का इस्तेमाल करें।

एक्स रे
शरीर के किसी जोड़ या किसी भाग में दर्द होने पर डाक्टर तुंरत एक्स-रे करवाने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है एक्स-रे से निकलने वाली खतरनाक रेडियोएक्टिव किरणें शरीर में कैंसर पैदा कर सकती हैं। एक बार किसी अंग का एक्स-रे से हुई हानि को भरने में एक साल से ज्यादा का समय लग सकता है। एैसे में डाक्टर रोगी को कई बार एक्स-रे करवाने की सलाह देते हैं। आप खुद ही इस बात का अंदाजा लगा सकते हो।

एंटीबायोटिक्स
डाक्टर के कहने पर हम कभी-कभी एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन करते हैं। जिससे सीधे लिवर को नुकसान पहुंचता है। एंटीबायोटिक्स जैसे की पैरासिटामोल को ही ले लीजिए। यह कई तरह के स्वास्थ लाभ देती है लेकिन अधिक सेवन करने से यह सीधा लीवर को डेमेज कर सकती है। यही नहीं यदि आप लंबे समय से एंटीबायोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह किडनी को खराब कर सकती हैं।

लैब टेस्ट
लैब टेस्ट डाक्टरों की कमाई का मुख्य और अहम भाग है। इसलिए डाक्टर हमेशा रोगी को लैब टेस्ट करवाने को कहते हैं। डाक्टरों को दवाईयों और लैब टेस्ट से अतरिक्त कमीशन आता है। इसी वजह से डाक्टर रोगी को मेडिसन खाने की सलाह देते हैं।

अल्सर
कई बार खान-पान में बदलाव होने के बाद पेट से संबंधित बीमारीयां हो जाती हैं। जिस वजह से सीने में जलन भी हो जाती है। एैसे में डाक्टर कुछ एंटी-गैस्ट्रिक दवाइयों को देते हैं जो आंतों में अल्सर पैदा कर सकती हैं। साथ ही साथ यह हड्डियों को कमजोरी, शरीर में विटामिन बी 12 को कम करना आदि। क्योंकि ये दवाएं साईड इफेक्ट करती हैं।

एैसी ही कई बाते हैं जो डाक्टर आपसे छुपाते हैं। इसलिए किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले उसे अच्छे से समझे और तभी उसका इस्तेमाल करें। आयुर्वेद में हर बीमारी का इलाज संभव है और इसका कोई साईड इफेक्टस भी नहीं होता है।

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