शिशु का आहार और उनकी समस्या

बच्चों की प्रकृति बहुत सुन्दर होती है। उचित आहार और सही देखभाल से ही बच्चे की ग्रोथ अच्छी होती है। इसलिए शिशु का ख्याल रखना उसकी मां का पहला कार्य होता है। शिशु का लालन पालन यदि सही तरह से नहीं होगा तो वह जीवनभर परेशानीयों का सामना करता रहेगा। शिशु को आहार उसकी उम्र के हिसाब से देना चाहिए इसलिए शिशु की माता को ये पता होना चाहिए की कौन से आहार कब देना है और कौन सा कब नहीं देना। आहार की उचित जानकारी शिशु की माता को पता होनी चाहिए।

आहार का क्या प्रभाव पड़ता है शिशु पर –

1. उचित आहार के जरिए ही बच्चे का शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास होता है।
2. पौष्टिक आहार देने से बालक बचपन से ही स्वस्थ और सुंदर होता है।
3. आहार के जरिए ही बालक के कार्य में जो शक्ति चाहिए होती है वह पूरी होती है।

दूध सबसे महत्वपूर्ण आहार होता है। जन्म के 6 माह तक बच्चे को स्तनपान कराना जरूरी होता है। 6 से 7 माह के बाद जैसे जैसे बच्चे का शरीर बढ़ता है उसको पोष्टिक तत्वों की जरूरत होती है। जैसे-
विटामिन ए
यह बच्चे के लिए बहुत आवश्यक है। वैसे तो मां के दूध से उसे विटामिन ए प्राप्त होता है। लेकिन इसकी कमी से बच्चे को पेट, कान, आंख और फेफड़ों से संबंधित रोग हो सकता है। अतः इसकी कमी को पूरा करने के लिए काॅडलिवर आॅयल की कुछ बूंदें देनी चाहिए।

विटामिन बी
यह बच्चे के पेट संबंधी रोग दूर करता है और आंखों को तेज रखता है। इसके लिए बच्चे को बिना पाॅलिश किया हुआ चावल दिया जाना चाहिए।

विटामिन सी
ये विटामिन बच्चे के मसूड़ों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए होता है। साथ ही यह बीमारी रोधक भी होता है। इसके लिए शिशु को नारंगी या संतरे का रस देना चाहिए।

विटामिन डी
यह बच्चे में कैल्शियम का विकास करता है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चे को धूप का सेवन जरूर करायें। बच्चे को धूप में लिटाना जरूरी है।

शिशु को भोजन में क्या देना चाहिए

ठोस खाना
जब बच्चा 3 महीने का हो जाए तो उसे थोड़ा ठोस भोजन देना चाहिए। 6 महीने पूरे होने के बाद बच्चे को थोड़ा दलिया और सूजी घोलकर देनी चाहिए। इससे बच्चे को पूरी मात्रा में प्रोटीन मिलता है।

सन्तरे का रस
बच्चे को तीसरे महीने में सन्तरे का रस दिया जाना चाहिए। दूध पिलाने के एक से डेढ़ घंटे पहले सन्तरे का रस बच्चे को दें। यह दिन में दो बार

छोटी-छोटी बूंदे करके बच्चे को दें। इससे विटामिन सी की पूर्ति बच्चे में होती है। धीरे-धीरे इसकी मात्रा को बढ़ा भी सकते हैं।
हरी सब्जी
जब बच्चा 7 महीने का हो जाए तो उसे लौकी, परवल, चुकन्दर आदि शोरबा बच्चे को देना चाहिए।

आलू
7 वें माह में बच्चे को भुना हुआ आलू मैश करके उसे सप्ताह में 3 बार बच्चे को दिया जा सकता है।

फल
सेब, खुमानी, अंजीर आदि को पानी में उबालकर देना चाहिए।

पानी
बच्चे को पानी जरूर दें। बीच-बीच में पानी को बच्चे को पिलाते रहना चाहिए। इससे खाना पचने मे आसानी होती है।

आइये एक नजर डालते हैं। बच्चों के डायट प्लान पर-

7 मास से 12 मास के बच्चे का डायट प्लान

1.  6.30 बजे सुबह————- दूध पिलाना।
2.  10.30 सुबह   ————- अन्न, दलिया, दूध की खीर।
3.  2.30 दिन में————— दूध, बिस्कुट आदि।
4.  6.30 बजे सांय————– खिचड़ी, सिका हुआ टोस्ट, दूध की खीर आदि।
5.  9.30 रात में  ————– दूध पिलाना।
1 साल से डेढ़ साल के बच्चे का डायट प्लान

1. 6 बजे सुबह—————- फलों का रस दें।
2. 8 बजे सुबह—————- दूध, अन्न या फल।
3. 11.30 बजे सुबह————-  दलिया या खीर अथवा सामान्य खाना।
4. 3 बजे दिन में ————–  दूध और फल।
5. 6.30 बजे सांय ————-   सामान्य भोजन
6. 8 बजे रात में ————–  दूध दें।

बच्चों काे उम्र के अनुसार आहार देना चाहिए। अइये जानते हैं उम्र के हिसाब क्या खिलाना चाहिए।
तीन से पांच महीने के बच्चे के लिए आहार

तीन से पाच माह के शिशु के लिए बहुत ही जरूरी है कि उसे इस समय में पौष्टिक चीजे मिलें। आप बच्चे को शुरू में सेरेलेक दें। और हर घंटे थोड़ा खिलाते रहें। सूजी, रागी पाउडर को दूध में चीनी के साथ मिलाकर बच्चे को देना शिशु की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इस दौरान आप बच्चे को चम्मच से खिलाने की आदत डालें। इसके अलावा आप बच्चे को अच्छी तरह से पचने वाली चीजें जैसे मूंग की दाल ओर चावल से बनी हुई खिचड़ी खिला सकते हैं।
इस तरह ध्यान देने से बच्चे का वजन भी बढ़ता है।

6 माह से 8 माह के बच्चे के लिए
जैसे ही बच्चा 6 माह का हो जाता है तब उसे थोड़ा ठोस आहर दें। जैसे सब्जियों व फलों को देना। इस दौरान बच्चे के दांत भी निकलने लगते हैं। एैसे में बच्चों को दस्त लगने की संभावना भी अधिक होती है। आप शिशु को बिस्कुट चूसने के लिए दे सकते हो।गाजर, पालक व गाेभी को अच्छे से उबालकर  और पीसकर उसमें थोड़ा नमक डालकर बच्चे को दें।

9 माह से दस माह के बच्चे के लिए आहार
इस समय में बच्चे को समय समय पर दूधए फलों का रस और संतुलित खाना आदि दे सकते हैं।

बच्चे को यदि डायट प्लान के अनुसार खाना मिले तो वह कभी बीमार नहीं पड़ेगा और हमेशा स्वस्थ रहेगा। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि बच्चे को डायट प्लान का पता होना। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की बच्चे को भोजन उसकी उम्र के हिसाब से मिलें।

डिसक्लेमर : sehatsansar.com में जानकारी देने का हर तरह से वास्तविकता का संभावित प्रयास किया गया है। इसकी नैतिक जिम्मेदारी sehatsansar.com की नहीं है। sehatsansar.com में दी गई जानकारी पाठकों के ज्ञानवर्धन के लिए है। अतः हम आप से निवेदन करते हैं की किसी भी उपाय का प्रयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से सलह लें। हमारा उद्देश्य आपको जागरूक करना है। आपका डाॅक्टर ही आपकी सेहत बेहतर जानता है इसलिए उसका कोई विकल्प नहीं है।