देव उठनी एकादशी व्रत की विधि

कार्तिक मांह की शुक्ल पक्ष के ग्यारस के दिन देव प्रबोधिन एकादशी मनाई जाती है। दिवाली से ठीक ग्यारहवे दिन यह दिन आता है। इस एकादशी को देव उठनी एकादशी को भी कहा जाता है। यह एकादशी इंसान को सभी पापों से मुक्त करती है। इसी दिन तुलसी जी का विवाह भी होता है। इस दिन विष्णु भगवान क्षीरसागर से उठते हैं। कैसे करें इस व्रत को और क्या फल मिलते हैं इस व्रत को करने से आइये जानते हैं।
देव उठनी एकादशी व्रत की विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठें
नदी या तालाब में स्नान करना इस दिन अच्छा माना जाता है।
निराहार व्रत करें।
इस दिन सबसे पहले आप घर के मंदिर की साफ सफाई करें। और मंदिर में फल फूल और भगवान की मूर्ति स्थापित करें।
मंदिर में सिघाड़े फल और पकवान आदि का भोग लगाएं।
और दीपक जलाएं।

देव उठनी एकादशी व्रत के फायदे

जो इंसान इस दिन व्रत रखता है उसे कई तीर्थ दर्शन और हजार अश्वमेघ यज्ञ करने का फायदा मिलता है।
इंद्रियों पर विजय पाने के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
इस दिन की व्रत की कथा सुनने से 100 गायों के दान के बराबर फल मिलता है।
इस दिन व्रत करने से आपकी सारी मनोकामना पूरी होती है।

देव उठनी एकादशी का व्रत करने से इंसान को मरने के बाद मोक्ष मिलता है।

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