चन्द्रभेदी प्राणायाम – विधि और फायदे

योग के जरिए कई तरह की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। शरीर में होने वाले परिवर्तनों और उनसे होने वाली बीमारियों से बचने के लिए योग की एक एैसी ही क्रिया है चन्द्रभेदी प्राणायाम। इस योग को करने से हमारे शरीर में मौदूज नाड़ी जिसे इड़ा नाड़ी कहते हैं वह शुद्ध होती है जिससे शरीर की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

चन्द्रभेदी प्राणायाम के फायदे

  • इस योग को करने से पेट की गर्मी दूर होती है।
  • मुंह के छाले दूर होते हैं।
  • चर्म रोग ठीक होता है।
  • दिल की बीमारी में राहत मिलती है।
  • खट्टी डाकरे बंद होती हैं।
  • सिर और शरीर की गर्मी शांत होती है।

चन्द्रभेदी प्राणायाम करने की विधि।

कंबल या दरी बिछाएं

  • सुखासन में बैंठें।
  • गर्दन, कमर और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • अब बायें हाथ को बायें घुटने पर ही रखें। और दायें हाथ के उंगूठे से दांय नाक के छेद को बंद कर दें। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
  • बायीं नाक से लंबी और गहरी सांस को भरें और हाथ की अंगुलियों से बायें नाक के छेद को भी बंद कर दें।
  • जितनी देर तक हो सके आप अपनी श्वास को रोकने का प्रयास करें।
  • इस क्रिया को कम से कम दस बार जरूर करें।

 

किन लोगों को चन्द्रभेदी प्राणायाम नहीं करना चाहिए।

वे लोग जिन्हें दमा की शिकायत हो, लो ब्लडप्रेशर की समस्या या दिल की बीमारी हो वे इस आसन को न करें।

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