भस्म से भी दूर होती हैं बीमारियां

आप सभी जानते हैं भगवान शिव को भस्मधारी कहा जाता है।शिवजी के बारह ज्योर्तिलिंग हैं उनमे से एक उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर है । यह एक मात्र शिव लिंग है जहां शिवजी की भस्म आरती होती है।

भस्म लगाने का रहस्य

 

 

सदा शिव भस्म को अपने वस्त्र के रूप में शरीर पर लगाते है। भगवान शिव अन्य देवताओं की तुलना में सबसे अलग हैं। जहां अन्य देवी देवता अनेक आभूषणों और गहनों से सुसज्जित रहते हैं वही शिव जी मृगछाल को धारण किए हुए और शरीर में भस्म को लगाए हुए हैं। भस्म यानी राख जिसे इस दुनिया का सार कहा जाता है। एक दिन सभी ने भस्म में परिवर्तित हो जाना है। इस दुनिया या सृष्टि के भस्म को भगवान शिव धारण किए हुए रहते हैं। 

भस्म बनाने का तरीका

भस्म बनाने के लिए गाय के गोबर के कंडे, पलाश, पीपल, बड़, शमी और बड़ के पेड़ की लकड़ियों को साथ-साथ आग में जलाया जाता है। और इनके जलने के बाद जो राख बनती है वो भस्म कहलाती है। इस भस्म को छानकर भगवान शिव को इसका लेप किया जाता है।

शुद्धि करता है भस्म 

राख से कई तरह की चीजें साफ हो जाती हैं। उसी तरह से भस्म का टीका माथे पर लगाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। और इंसान पापों से मुक्त होता है।

समाज में सम्मान मिलता है

एैसी मान्यता है कि जो इंसान भस्म धारण करता है उसका आकर्षण बढ़ता है। साथ ही उस इंसान को समाज में इज्जत और मान प्राप्त होता है। भस्म का तिलक हर इंसान को लगाना चाहिए।

स्वास्थ के लिए भस्म का प्रभाव

भस्म शरीर के छिद्रों को बंद करता है जिस वजह से शरीर को न तो ठंड लगती है और न ही गर्मी। त्वचा से संबंधित हर तरह के रोग को खत्म करती है भस्म की राख। 

परिस्थितियों में तालमेल

भस्म जिस तरह से अत्याधिक ठंड और गर्मी में या प्रतिकूल वातावरण में शरीर को अनुकूल बनाता है। ठीक इंसान को भी समय के हिसाब से हर तरह की समस्या के हिसाब से खुद ढ़ालना चाहिए। जिससे वह समस्या से बच सकता है।

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