बच्चों की मालिश करने का सही समय

बच्चों की मालिश करने का सही समय

आज हम बात करेगें बच्चों की मालिश करने का सही समय के बारे में। बच्चों के लिए मालिश बहुत ही जरूरी होती हैं और शिशु की मालिश की परम्परा बहुत ही पुरानी है। यह शिशु के लिए कई मायनों में फायदेमंद होती है। इससे उनके शरीर का विकास होता है बच्चों की मालिश माता को चाहिए कि वो किसी नौकरानी से न करवाएं बल्कि खुद ही करें।

शिशु की रोजाना मालिश, शिशु के प्रति अपने लाड प्यार और ममता को जाहिर करने का एक बढिया तरीका है। मालिश आपके बच्चे को शांत करने और उसे आरामदायक रखने में काफी मदद करती है। यह अच्छी नींद से लेकर कम रोने तक मददगार हो सकती है। बच्चों की मालिश हमेशा जैतून के तेल, मक्खन से करनी चाहिए।

अगर यह आपके घर में किसी कारण से उपलब्ध न हो तो नारियल के तेल या सरसों के तेल से करनी चाहिए। बच्चों की मालिश का आप किसी भी समय कर सकते हो। आप चाहे तो उसे कमरे में न करके धूप में लिटा कर मालिश सकते हो। इससे उसके शरीर को सूर्य किरणों से विटामिन डी मिलता है। इससे उसकी त्वचा विकार रहित होती हैं साथ ही उसकी हड्डियों को मजबूती मिलती है। आइये जानते हैं बच्चे की मालिश किस समय करनी चाहिए।

  • अपने शिशु की मालिश तब करें जब वह भूखा या फिर अधिक थका हुआ हो। इस प्रकार से वो अपनी मालिश का आनन्द ले सकेगा। आप बच्चे की मालिश दिन में किसी भी समय कर सकते हो। आप उसकी मालिश और नहाने के समय के अनुसार उसके स्तनपान, सोने और जगने की दैनिक दिनचर्या निधारित कर सकते हो।
  • शिशुओं को पूर्वानुमानित चीजें बहुत ही पसंद आती हैं इसलिए प्रतिदिन वहीं चीजें,उसी कर्म में और दिन में उसी समय पर करनी चाहिए। इससे आपका बच्चा अधिक सुरक्षित व प्रसन्नता महसूस करता है जैसे कि आप सबसे पहले अपने शिशु की मालिश करते हो फिर नहलाते हो, फिर उसे स्तनपान करवा कर उसे सुला देते हो। जब आप नियमित रूप से इसे करते हो तब आपका शिशु इस दिनचार्य को समझ जाता है और रोजाना इसी चीज की उम्मीद करता है।
  • नवजात शिशु के साथ इतनी लंबी प्रक्रिया अपनाना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि उन्हें कई बार जल्दी भूख लगने लगती है या फिर उन्हें थकान हो जाती है। इसलिए शुरुआत में उसे नहलाने और मालिश का समय कम ही रखें। जैसे जैसे आपका शिशु बड़ा होने लगता हे वैसे वैसे उसके समय भी बढ़ा दें।
  • मालिश करने से शिशु को आराम मिलता है इसलिए आप उसकी मालिश को रात को सोने से पहले भी करके उसे अपने दिनचार्य का हिस्सा बना सकते हैं।
  • अगर आपका शिशु रात को अधिक समय तक रोता है तो शाम को मालिश करने से इसमें कमी आ सकती है। आमतौर पर जब भी आपको लगे कि आपका शिशु रोने वाला है तब उससे पहले ही आप उसकी मालिश शुरू कर दें। इससे उसको आराम मिलता है साथ ही वो कम रोता है।

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शिशु की मालिश कब नहीं करनी चाहिए

  • अगर आपके शिशु की त्वचा पर किसी तरह के चकत्ते हो गये है तब डॉक्टर की सलाह से पहले उसकी त्वचा पर किसी प्रकार का तेल या क्रीम न लगाएं। अगर आपको लगता है कि यह चकत्ते मालिश के तेल या क्रीम से हो रहे हैं तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
  • अगर आपके शिशु को बुखार हो या फिर उसकी तबियत ठीक न हो तो उसकी मालिश कर्ण अबंद कर देनी चाहिए। मगर कुछ जानकारों का मानना है कि वायरल बुखार के दौरान शिशु की हल्की मालिश उसे आराम पहुंचाती है।
  • अगर बच्चे का बुखार बढ़ रहा है तो हो सकता है कि उसे ठंड लग रही हो ऐसे में आपको चाहिए कि शिशु के कपड़े उतारे बिना ही इनके उपर से ही मालिश की तरह हाथ फेर सकते हैं।
  • बच्चों की मालिश कोमलता से हल्का दबाव देते हुए और सावधानी से करनी चाहिए। जोड़ों पर गोलाकार हाथ चलाकर चारों तरफ मालिश करके अंग को आठ से दस बार चलाकर जोड़ों को व्यायाम देना चाहिए। इससे जोड़ मजबूत और शुद्द होते हैं नवजात शिशु की चालीस दिन तक कम से कम और अधिक से अधिक छह माह तक लोई करके मालिश की जाएं तो यह बहुत ही हितकारी होती है।

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