चने के फायदे

आयुर्वेद में चने की दाल और चने को शरीर के लिए स्वास्थवर्धक बताया गया है। चने के सेवन से कई रोग ठीक हो जाते हैं। क्योंकि इसमें प्रोटीन, नमी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स पाये जाते हैं। चना दूसरी दालों के मुकाबले सस्ता होता है और सेहत के लिए भी यह दूसरी दालों से पौष्टिक आहार है। चना शरीर को बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनाता है। साथ ही यह दिमाग को तेज और चेहरे को सुंदर बनाता है। चने के सबसे अधिक फायदे इन्हे अंकुरित करके खाने से होते है।

सुबह खाली पेट चने से मिलते है कई फायदे

1. शरीर को सबसे ज्यादा पोषण काले चनों से मिलता है। काले चने अंकुरित होने चाहिए। क्योंकि इन अंकुरित चनों में सारे विटामिन्स और क्लोरोफिल के साथ फास्फोरस आदि मिनरल्स होते हैं जिन्हें खाने से शरीर को कोई बीमारी नहीं लगती है। काले चनों को रातभर भिगोकर रख लें और हर दिन सुबह दो मुट्ठी खाएं। कुछ ही दिनों में र्फक दिखने लगेगा।

2. रातभर भिगे हुए चनों से पानी को अलग कर उसमें अदरक, जीरा और नमक को मिक्स कर खाने से कब्ज और पेट दर्द से राहत मिलती है।

3. शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए अंकुरित चनों में नींबू, अदरक के टुकड़े, हल्का नमक और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं। आपको पूरे दिन की एनर्जी मिलेगी।

चने का सत्तू
चने का सत्तू भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद औषघि है। शरीर की क्षमता और ताकत को बढ़ाने के लिए गर्मीयों में आप चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलकार पी सकते हैं। यह भूख को भी शांत रखता है।

पथरी की समस्या में चना
पथरी की समस्या अब आम हो गई है। दूषित पानी और दूषित खाना खाने से पथरी की समस्या बढ़ रही है। गाल ब्लैडर और किड़नी में पथरी की समस्या सबसे अधिक हो रही है। एैसे में रातभर भिगोए चनों में थोड़ा शहद मिलाकर रोज सेवन करें। नियमित इन चनों का सेवन करने से पथरी आसानी से निकल जाती है। इसके अलावा आप आटे और चने का सत्तू को मिलाकर बनी रोटियां भी खा सकते हो।

शरीर की गंदगी साफ करना
काला चना शरीर के अंदर की गंदगी को अच्छे से साफ करता है। जिससे डायबिटीज, एनीमिया आदि की परेशानियां दूर होती हैं। और यह बुखार आदि में भी राहत देता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए
चना ताकतवर होता है। यह शरीर में ज्यादा मात्रा में ग्लूकोज को कम करता है जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा मिलता है। इसलिए अंकुरित चनों को सेवन डायबिटीज के रोगियों को सुबह-सुबह करना चाहिए।

मूत्र संबंधी रोग
मूत्र से संबंधित किसी भी रोग में भुने हुए चनों का सवेन करना चाहिए। इससे बार-बार पेशाब आने की दिक्कत दूर होती है। भुने हुए चनों में गुड मिलाकर खाने से यूरीन की किसी भी तरह समस्या में राहत मिलती है।

पुरूषों की कमजोरी दूर करना
अधिक काम और तनाव की वजह से पुरूषों में कमजोरी होने लगती है। एैसे में अंकुरित चना किसी वरदान से कम नहीं है। पुरूषों को अंकुरित चनों को चबा-चबाकर खाने से कई फायदे मिलते हैं। इससे पुरूषों की कमजोरी दूर होती है। भीगे हुए चनों के पानी के साथ शहद मिलाकर पीने से पौरूषत्व बढ़ता है। और नपुंसकता दूर होती है।

पीलिया के रोग में

  • पीलिया की बीमारी में चने की 100 ग्राम दाल में दो गिलास पानी डालकर अच्छे से चनों को कुछ घंटों के लिए भिगो लें और दाल से पानी को अलग कर लें अब उस दाल में 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4 से 5 दिन तक रोगी को देते रहें। पीलिया से लाभ जरूरी मिलेगा।
  • पीलिया रोग में रोगी को चने की दाल का सेवन करना चाहिए।

कुष्ठ रोग में चना

कुष्ठ रोग से ग्रसित इंसान यदि तीन साल तक अंकुरित चने खाएं। तो वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

 

गर्भवती महिला को यदि मितली या उल्टी की समस्या बार-बार होती हो। तो उसे चने का सत्तू पिलाना चाहिए।

 

अस्थमा रोग में

अस्थमा से पीडि़त इंसान को चने के आटे का हलवा खाना चाहिए। इस उपाय से अस्थमा रोग ठीक होता है।

भीगे चने
यह जरूरी नहीं कि आपको केवल अंकुरित चने ही खाने हैं। रात को चनों को पानी में भिगों लें और सुबह व्यायाम करने के बाद इन भीगे हुए चनों को चबाकर खाएं। और बाद में चनों का बचा हुआ पानी भी पी लें। इस उपाय से आपको ताकत व बल मिलता है।

सौदर्य के लिए चना
नियमित रूप से यदि आप अंकुरित चनों का सेवन करते हो तो आप के उपर बुढ़ापा बहुत ही देर में आएगा। अंकुरित चनों में इंसान को ताकत देने की शक्ति होती है जिससे इंसान बूढ़ा नहीं होता है।और वह चुस्त रहता है।
चना सेवन किन लोगों को नहीं करना है 

वे लोग जिन्हें अफरा व गैस की समस्या होती हो वेअंकुरित चनों का सेवन करने से बचें।

 

त्वचा की समस्या में
चने के आटे का नियमित रूप से सेवन करने से थोड़े ही दिनों में खाज, खुजली और दाद जैसी त्वचा से संबंधित रोग ठीक हो जाते हैं।   ये भी पढे-चेहरे को सुंदर बनाने के तरीके

कफ दूर करे
लंबे समय से चली आ रही कफ की परेशानी में भुने हुए चनों को रात में सोते समय अच्छे से चबाकर खाएं और इसके बाद दूध पी लें। यह कफ और सांस की नली से संबंधित रोगों को ठीक कर देता है।

चेहरे की चमक के लिए चना
चेहरे की रंगत को बढ़ाने के लिए नियमित अंकुरित चनों का सेवन करना चाहिए। साथ ही आप चने का फेस पैक भी घर पर बनाकर इस्तेमाल कर सकेत हो। चने के आटे में हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम होती है। महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड जरूर खाना चाहिए।

दाद खाज और खुजली

एक महीने तक चने के आटे की रोटी का सेवन करने से त्वचा की बीमारियां जैसे खुजली, दाद और खाज खत्म हो जाती हैं।

धातु पुष्ट

दस ग्राम शक्कर और दस ग्राम चने की भीगी हुई दाल को मिलाकर कम से कम एक महीने तक खाने से धातु पुष्ट होती है।

  • रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ भुने हुए चने खाने से सांस की नली व कफ से संबंधित रोग ठीक होते हैं।
  • शहद को चने में मिलाकर पीने से नपुंसकता खत्म होती है।
  • खून साफ और त्वचा की रंगत को सुधारता है चना।
  • रूमाल व कपड़े में गर्म चने बांधकर सूंघने से सर्दि जुकाम में राहत मिलती है।
  • सुबह के व्यायाम के बाद यदि आप भीगे हुए चने खाते हैं तो इससे आपकी सेहत हमेशा स्वस्थ रहेगी।
  • चना सेहत और सौंदर्य को बढ़ाता है। इसलिए जो लोग निमित रूप से अंकुरित चने को खाते हैं वे कभी बीमार नहीं पड़ते हैं साथ ही साथ उनकी त्वचा के रंग में भी निखार आता है।

चने को आप खाने में जरूर इस्तेमाल करें। यह किसी दवा से कम नहीं है। चने खाने से एक नहीं कई फायदे मिलते हैं तो क्यों नहीं अंकुरित चनों का इस्तेमाल रोज किया जा सकता है। वैदिक वाटिका का प्रयास है आपके स्वास्थ के लिए हर जरूरी चीज को आप तक पहुंचाना जो आप और आपके परिवार के लिए जरूरी और फायदेमंद है।

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