आयुर्वेद और वास्तु के हिसाब से सोने का सही तरीका

जाने आयुर्वेद और वास्तु के हिसाब से सोने का सही तरीका और किस दिशा में सिर पैर कर के सोना चाहिए, best direction to sleep as per ayurved and vastu in hindi

दोस्तों आज हम आपसे सोने का सही तरीका इस बारे में बात करेंगें। भले ही हम अपने दिनचारी में बहुत से काम करते है वो काम कुछ सही होते हैं और कुछ गलत होते हैं जो काम गलत होते हैं उसका प्रभाव हमारे जीवन पर भले ही उसी समय न पड़ता हो। लेकिन उसका प्रभाव हमारे जीवन धीरे धीरे पड़ता है और यह प्रभाव आस पास की ऊर्जा को नुकसान पहुंचा कर आपकी जीवन शैली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

अगर हम हिन्दू शास्त्र और वास्तुविदों की बात करें तो सोते समय हमारे पैरों का पूर्व या दक्षिण में होना अनुचित होता है। इससे शरीर, दिल और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। आज इस आर्टिकल के द्वारा हम जानते हैं सोने का सही तरीका क्या है और गलत दिशा में सोने से जीवन पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। आइये विस्तार से जाने सोने का सही तरीका क्या है।

आयुर्वेद के हिसाब से सोने का सही तरीका

दक्षिण दिशा की तरफ सोने से

यदि हम दक्षिण दिशा के बारे में बात करते हैं तब वास्तुशास्त्र के अनुसार या दिशा यमलोक में स्तिथ है। अगर सोते समय आपके पैर दक्षिण दिशा की तरफ है तो इसका अर्थ है कि आप यमलोक की तरफ जा रहे हो यहीं कारण है कि दक्षिण दिशा को नकारात्मक ऊर्जा की दृष्टि से देखा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाएं तो उत्तर और दक्षिण धुव जब मिलते हैं तो चुम्बकीय ऊर्जा प्रवाहमान होती है। इसलिए उत्तर से दक्षिण दिशा की और चुम्बकीय ऊर्जा विद्यमान होती है।

उत्तर दिशा की तरफ से धनात्मक प्रवाह रहता है और दक्षिण दिशा क ओर से ऋणात्मक प्रवाह रहता है हमारे सिर का स्थान धनात्मक प्रवाह वाला होता है जबकि पैर का स्थान ऋणात्मक प्रवाह वाला होता है। यह दिशा चुम्बक के समान है ऐसे में जब आप सुबह उठते हैं तो आपका शरीर थका थका सा होता है। शारीरिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है जबकि दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोने से इस तरह की आपको कोई अनुभूति नहीं होती।

उत्तर दिशा की तरफ सोने से

उत्तर दिशा में धनात्मक या सकरात्मक ऊर्जा प्रवाहित होती है। उत्तर दिशा में सिर रखकर सोने से सिर में भी धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और पैरों में ऋणात्मक ऊर्जा का निकास होता है। यह दिशा बताने वाले चुम्बक के नियम के समान कार्य करता है कि धनात्मक प्रवाह आपस में न मिल सकें। यदि आप सोते समय अपने सिर को उत्तर दिशा की तरफ रखते हैं तो उत्तर दिशा की धनात्मक शक्ति और सिर की धनात्मक तरंग एक दुसरे से विपरीत भागेगी। जिसके कारण आपके मस्तिष्क में बैचेनी बढ़ेगी और आपको नींद भी अच्छे से नहीं आयेगी।

पूर्व दिशा की तरफ सोने से

वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा को बहुत ही श्रेष्ट माना गया है। पूर्व दिशा में सर रखकर सोने से ध्यान, एकाग्रता, आध्यात्मिक और स्मृति में वृद्दि होती है। अगर हम विधार्थी की बात करें तो पूर्व दिशा में सर रखकर सोना उसके लिए बहुत ही गुणकारी होता है। पूर्व दिशा में सर रखकर सोने वाले लोग हमेशा सही रहते हैं। यहीं कारण है कि पूर्व दिशा में सिर रखकर सोना भुत ही लाभप्रद होता है।

पश्चिम दिशा की तरफ सोने से

पश्चिम दिशा की ओर सिर रखकर कभी भी नहीं भी नहीं सोना चाहिए। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा में सूर्य और अन्य देवताओं का वास होता है जबकि पश्चिम दिशा में सिर रखकर सोने से आपके पैर पूर्व दिशा में चले जाते हैं। यदि आपके पैर पूर्व दिशा में होगें तो देवी देवताओं की तरफ पैर करना अशुभ माना जाता है। जिसके कारण नकारात्मक उर्जा का संचार होता है। यदि आपके पैर पश्चिम  दिशा की तरफ हैं तब आपको बुरे बुरे सपने आते हैं और आपका मन बैचेन रहता है। यदि कारण हैं कि आपको पश्चिम दिशा में सिर रखकर कभी भी नहीं सोना चाहिए।

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