दमा का आयुर्वेदिक उपचार

जिंदा रहने के लिए श्वासों का चलना जरूरी है। श्वासों पर ही जीवन टिका हुआ है। नाक के जरिए आक्सिजन फेफड़ों तक जाती है और कार्बनडाइआक्साइड के रूप में नाक से निकलती है। ये एक स्वभाविक प्रक्रिया है। लेकिन इस स्वभाविक प्रक्रिया में  जब श्वासों की गति बढ़ने लगती है और इंसान को बेचैनी होने लगती है तब इसे दमा रोग कहा जाता है। दमा एक खतरनाक रोग है जिसका समय रहते बचाव करना जरूरी है नहीं तो इस रोग से जान को भी खतरा हो सकता है।

दमे का कारण
दमा रोग की मुख्य वजह है कफ और वायु से होने वाली दिक्कतें।

कफ के कारण दमा रोग का होना
कफ पैदा करने वाले चीजों को ज्यादा इस्तेमाल करना जैसे मांस का सेवन, दूध और दही का अत्याधिक सेवन आदि की वजह से भी दमा रोग हो सकता है।

वायु प्रकोप  के कारण दमा का होना
हवा के जरिए दमा रोग शरीर में हो सकता है। जैसे धूम्रपान करना, अत्याधिक ठंडा पानी पीना, ज्यादा मैथुन करना और ज्यादा व्यायाम करना भी। प्रदूषण से दमा होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। प्रदूषित हवा सीधी शरीर में जाकर दमा, खांसी, बुखार आदि रोग पैदा करती है।

जुकाम के कारण
यदि जुकाम बिगड़ जाए और नाक और गले में सूजन आ जाए तो यह भी दमे का कारण बन सकती है।

दमे के लक्षण
1. दमे के रोग के लक्षणों के बारे में भी जानना जरूरी है। दमा होने पर गले से घुर-घुर या शू-शू की आवाज आती है। साथ ही सासों का तेज चलने से सीने में दर्द भी होता है।
2. कफ जमे होने की वजह से रोगी को नींद न आने की दिक्कत भी हो जाती है। और सोते समय भी भंयकर दर्द होता है।
3. ज्यादा पसीना आना, बार-बार तेजी से सांस लेना, एलर्जी होना, मुख का सूखना और दिल का तेज गति से धड़कना आदि लक्षण प्रमुख होते हैं।

इलाज

दमा रोग इतनी आसानी से दूर नहीं होता है। यह ठीक होने में कुछ समय लेता है। दमा के  इलाज से पहले इस बात का पता लगाया जाता है कि यह किस कारण से हुआ है फिर उसी कारण को ठीक करके दमा का इलाज होता है।

1. दमा से ग्रसित लोगों को अपने खान-पान पर जरूर ध्यान देना चाहिए। अचार, दही, ठंडा पानी, फास्ट फूड और कफ को बढ़ाने वाली चीजों से दूर रहना चाहिए।
2. शराब, तंबाकू, धूम्रपान और देर रात तक काम करने की आदतों को छोड़ना चाहिए।
3. बैगन, मूंग, चना, प्याज, लहसुन, लौंग, हरा धनिया, अदरक, अनार, लौकी, तोरी, हल्दी, सेब, पपीता, चीकू आदि फलों और सब्जियों का सेवन अधिक करना चाहिए।
4. दशमूल का काढ़ा जो कि बाजार में आसानी से मिल जाता है। उसका सेवन करें।
5. छोटे बच्चे की मां के दूध में थोड़ा चंदन मिलाकर उसकी बूंद नाक में डालने से दमा में राहत मिलती है।
6. गरम सरसों के तेल की मालिश रोगी के छाती पर लगाने से दमे से राहत मिलती है।
7. दमा का मुख्य कारण कब्ज होती है इसलिए इसे दूर करने के लिए हरड़़ चूर्ण का सेवन रात को खाना खाने के बाद करना चाहिए।

दमा कोई ला-इलाज बीमारी नहीं है। समय रहते इसका इलाज संभव है लेकिन यदि दमा रोग पर शुरूवात से ध्यान न दिया जाए तो ये रोग रोगी के लिए खतरनाक बन सकता है। इसलिए समय समय पर अपनी जांच करवाते रहना चाहिए।

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