अर्धमत्सयेंद्रासन के फायदे

योग में अर्धमत्सयेंद्रासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन नाम के प्रसिद्ध योगी हुए हैं। इन्हें मच्छन्दरनाथ भी कहा जाता है। वे इस आसन पर बैठकर साधना करते थे। यह योग बैठकर किया जाने वाले योग में से एक है। इस योग को करने से आपको कई फायदे मिलते हैं। यह आसन करने में थोड़ा से मुशकिल है लेकिन असंभव नहीं। ध्यान से एक-एक चरण को पढ़ें। अर्धमत्सयेंद्रासन को किस तरह से करना चाहिए। वैदिक वाटिका आपको बताएगी। 

अर्धमत्सयेंद्रासन के फायदे

  • इस आसन को करने से लिवर, पेट और किडनी की समस्याएं दूर होती हैं।
  • यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है।
  • कंधे की अकड़न और विकार दूर होते हैं।
  • डायबीटीज के रोगीयों के लिए फायदेमंद होता है ये योग।
  • पेट के रोग और कब्ज ठीक होती है।
  • पेट की चर्बी को भी कम करता है अर्धमत्सयेंद्रासन।

अर्धमत्सयेंद्रासन करने का तरीका

  • दोनों पैरें को सामने फैलाकर बैठें।
  • अब बायें पैर को मोडकर बायीं एड़ी को दाहनें हिप के नीचे आराम से रखें।
  • फिर दायें पैर को घुटनों से मोड़ते हुए दायें पैर का तलवा लायें और घुटने की बायीं ओर जमनी पर रख लें।
  • अब बायें हाथ को दायें घुटने की दायीं ओर ले जाएं और कमर को घुमाते हुए दायें पैर के तलवे को पकड़ लें। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
  • इसके बाद दायें हाथ को अपनी कमर पर रखें। 
  • सिर से कमर तक का हिस्सा दायीं ओर मोड़ें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार थोड़ी देर इसी स्थिति में बैठे रहें।
  • अब ऐसे ही दूसरी ओर से करे। इस आसन का अभ्यास तीन से पांच बारी करना चाहिए।

सावधानी

जिन लोगों का पेट का आपरेशन हुआ हो, गर्भवती महिलाएं और स्लिप डिस्क के रोगी इस आसन को न करें। अर्धमत्सयेंद्रासन को किसी योग्य गुरू की देख-रेख में ही करें। 

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