एक्यूप्रेशर बिंदु – हृदय रोग के उपचार के लिये

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हृदय लाल रंग के थैले जैसा और चार खण्डों वाला अंग होता है जो शरीर दोनाें फेफड़ों  के बीच और छाती की बांयी तरफ होता है। इंसान के जीवन से मृत्यु तक हृदय अपना काम करता रहता है।
महिलाओं की उपेक्षा पुरूषों का हृदय का आकार बड़ा होता है। हृदय को रोग से बचाना बहुत जरूरी है। हृदय की मुख्य समस्या जैसे हृदय घात, ब्ल्डपे्रशर और सीने में जलन आदि। इसलिए हम आपको बता रहे हैं कैसे एक्यूपे्रशर के जरिए आप दिल की बीमारी से बच सकते हो।
एक्यूप्रेशर से हृदय रोग का उपचार
हृदय से संबंधित केंद्र शरीर में बांयें हाथ और बांये पैर के तलवे में होते हैं। हृदय रोग से बचने के लिए बांये पैर के तलवे और बायें हाथ की हथेली के उपरी भाग के उपर प्रेशर देना चाहिए। इन जगहों को दबाने पर कांटे की चुभन जैसा अनुभव होता है। जब आप इन पर प्रेशर देते हैं।

हृदय और खून संचार से संबंधित रोगों में में बायें हाथ और बायें पैर के इन केद्रों को दबाना चाहिए। जैसा कि पहले और दूसरे चित्र में आपको दिखाया गया है। आपको प्रेशर किसी उपकरण या अंगूठे से देना चाहिए। प्रेशर केवल दो उंगलियों के नीचे ही नहीं चारों उंगलियों के हथेली और तलवों पर भी प्रेशर देना चाहिए।

इसके अलावा हमें फेफड़ों, गुर्दों और थोरेसिक वरट्रीबा को ठीक करने के मुख्य केद्रों को भी प्रेशर देना चाहिए। जैसा कि चित्र तीन और चार में दिखाया गया है।

हृदय रोग की समस्या में पीठ की रीढ़ की हड्डी को दोनो तरह उपर और नीच तक हाथों के अंगूठे से तीन बार हल्के-हल्के से दबाएं जैसे कि चित्र पांच में दिखाया गया है। प्रेशर रोगी की सहन शक्ति के अनुसार ही दबाएं।

यदि आप नियमित इन एक्यूप्रेशर बिंदु के उपाय को करते हैं तो आप  हृदय रोग से संबंधित बीमारियों से आसानी से बच सकते हो। इसके अलावा आप अपने खाने में आयुर्वेद में बताए गए नियमों को भी अपनाएं।

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